गांव मेरा और शहर तेरा

village
Credit: Of course, non other than Google.

गांव मेरा और शहर तेरा

तेरे शहर में सभी
मेहमान से क्यों हैं ?
भीड़ तो है सड़कों पर मगर
एक दूजे से अनजान क्यों हैं?

याद आता है मुझे मेरा गांव
मिट्टी की ख़ुशबू, वो पीपल की छांव
गाय चराते वहां के गोपाल
हँसी-ठहाको से भरा चौपाल

तेरा शहर बड़ा व्यपारी है
यहाँ पानी तक बिकता है
मेरे गांव में सुबह शाम
बुजुर्गों से दुआएं मुफ्त में मिलता है

सड़के तेरे शहर की चौड़ी चौड़ी
यहाँ मन क्यों संकरी हो जाती है?
गांव में तो बिजली नहीं है फिर भी
मन से सबके सरलता की प्रकाश आती है

तेरे शहर में तुझे लोग
बड़ी गाड़ी और बड़े घर से जानते हैं
गांव में मुझे आज भी
मेरे पिता के नाम से पहचानते हैं

तेरे शहर में परिवार व्यवस्था है टूट रहा
संग अपनों का है छूट रहा
अब यहाँ पश्चिम की तस्वीर दिखती है
मेरे गांव ही है जहाँ भारत की आत्मा रहती है

चलो गांव में कि अब भी वहां पर
पीने को शुद्ध पानी और हवा मिल जाएगी
ज़्यादा नहीं तो दो चार साल और ज़्यादा ही
ज़िन्दगी में हँसी के पल जुड़ जाएगी

…………..अभय………………

 

Advertisements

37 thoughts on “गांव मेरा और शहर तेरा

Add yours

  1. I spent life in city… I only watch village in movies and tv serials. in my childhood, my friends told me about their village, I felt really bad as i didn’t have a chance to visit. But when I read that kind of articles, post I make a image in my mind and feel the beauty of a village. Thanks abhay for this wonderful creation. 👍

    Liked by 1 person

    1. There is two different life, one in city and the other in the village. Though village life is a bit harsh in terms of physical comfort and luxury, yet whenever I visit there, a sense of satisfaction and peace is always perceptible. If you get chance, don’t miss it to spend some time in village. Thank you for your kind words.

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: