सहानुभूति नहीं चाहिए

दुनियाँ विविधताओं (diversity) से भरा पड़ा है. लोगों के कई प्रकार मिल जायेंगे. पर मैं आज एक विशेष जमात के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखीं हैं, जो सर्वव्यापी (ubiquitous) होते हैं . वो हैं सांत्वना या सहानुभूति (Sympathy or condolence) देने वाले लोग. मैं यह नहीं कह रहा कि सहानुभूति देना गलत बात है, ना ना यह बेहद जरुरी पक्ष है और कई बार आपको यह अवसाद (depression) की खायी में से खींच  ले आता है . पर, कई लोग इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार (birthright) समझ लेते हैं. वो इसलिए सहानुभूति नहीं देते की आपका मन हल्का हो बल्कि, उनका उद्देस्य कटाक्ष (insinuate/taunt) करना या आपको दोषी अनुभव कराना होता है. पढ़िए और मुझ तक अपनी राय पहुँचाना मत भूलिए….

सहानुभूति नहीं चाहिए

अगर आना हो तो
संग हो आइये
पर आपकी सहानुभूति
मुझे नहीं चाहिए
मैं चलूँगा
मैं बढूंगा
अंगारों पर दौडूंगा
नदियां लांघूँगा
पर्वत फानूंगा
ठेस लगेगी
तय है कि गिरूंगा
पर कोई बात नहीं
मैं फिर संभलूँगा
फिर से चलूँगा
मन करे तो अपने हाथों को
मेरे सिर पर फेर जाइये
पर आपकी सहानुभूति
मुझे नहीं चाहिए

……..अभय ……..

Advertisements

38 thoughts on “सहानुभूति नहीं चाहिए

  1. Excellent..Bahot hi khoobsurat likha hai

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया 🙂

      Liked by 1 person

  2. अमल करने वाली बात है
    Thanks

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया 😀

      Like

  3. तय है कि गिरूंगा
    पर कोई बात नहीं
    मैं फिर संभलूँगा
    फिर से चलूँगा……..बेहतरीन मार्गदर्शन—-

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया मधुसूदन जी 🙏

      Liked by 1 person

  4. सहानुभूति हमें कमज़ोर महसूस कराती है, कई बार मेरे साथ ऐसा हुआ, तब से मुझे सहानुभूति दिखाने वालों लोगो से कहु तो नफरत सी हो गई है।
    बहुत बढ़िया लिखा आपने👏👏👏

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया मुकांशु भाई, खुशी हुई कि मेरा संदेश आप तक सही सलामत पहुंचा!

      Liked by 1 person

      1. जी बिल्कुल सही सलामत पहुँचा😊😊

        Liked by 1 person

  5. बिल्कुल सही बात है आपकी अभय जी 👍

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया अजय जी 🙏

      Liked by 1 person

  6. बहुत प्रेरक कविता –
    आपकी सहानुभूति
    मुझे नहीं चाहिए…..

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया रेखा जी, प्रोत्साहन तो चाहिए 😊

      Liked by 1 person

  7. बहुत बहुत अच्छा।

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया गौरव जी 🙏

      Liked by 1 person

  8. Well written.Sometimes when people sympathise,it really makes the listener feel obnoxious.We should all learn to empathise rather than sympathise.

    Liked by 1 person

  9. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने अभय जी। पढकर बहुत अच्छा लगा। हंसाने के लिए व्यंग्य कर रही हूं सहानुभूति नहीं अपने से बड़ों का आशीर्वाद तो चाहिए न।

    Like

    1. धन्यवाद रजनी जी ☺️ लगता है आपने मेरी कविता की आखिरी चार पंक्तियों पर विशेष ध्यान नहीं दिया, दुबारा पढिये शायद आपकी आशंका दूर हो जाए 😀

      Like

    2. आपकी ये कविता मुझे अपने पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।

      Like

  10. अच्छा लिखा है आपने। पर कभी कभी हमे किसी से सहानुभूति की आस भी तो होती ही है। जरुरी नही की सहानुभूति हमे हर वक्त कमजोर ही बनाए।

    Liked by 1 person

    1. बिल्कुल सही, इसका वर्णन मैंने शुरू में ही किया कि यह पंक्तियाँ विशेष परिस्थितियों और विशेष वर्ग के लोगों के लिए है ☺️

      Liked by 1 person

  11. बहुत सुन्दर रचना ।।

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया ☺️

      Like

  12. बहुत खूब

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया अशोक जी!

      Liked by 1 person

  13. बहुत ही बढिया लिखा है |

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया शुक्रिया ☺️

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this:
search previous next tag category expand menu location phone mail time cart zoom edit close