वो रास्ता..

वो रास्ता.. सच्चाईयों से मुँह फेरकर, मुझपर तुम हँसते गए दल-दल राह चुनी तुमने,  और गर्त तक धसते गए खुद पर वश नहीं था तुम्हें , गैरों की प्रवाह में बहते गए जाल बुनी थी मेरे लिए ही, और खुद ही तुम फँसते गए नमी सोखकर मेरे ही जमीं की, गैरों की भूमि पर बरसते …

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