कुछ और..

कुछ और.. कुछ और नहीं मन में मेरे बस मिलने को आ जाता हूँ मत पूछो तेरी यादों में मैं क्यों घर बसाता हूँ मिलते ही तेरी आँखों से आँसू झर-झर बहते हैं लोग कहे उन्हें पानी,  मुझे वो  मोती ही लगते हैं अगणित रातों में जब-जब नींद तुम्हे न आती हो मेरी क्या गलती …

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