ओ मेघा !

  ओ मेघा ! अलग सी प्रतीक्षा, अलग सा समां है है आने को मेघा, सभी हर्षित यहाँ हैं ओ मेघा! इस बार मेरे छत के ऊपर तुम आकर केवल मत मंडराना जो दूर से आये हो तुम लेकर उस जल को हम पर बरसाना सूखी जमीं है, सूखा है तन पीले पड़े पत्ते, रूखा... Continue Reading →

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