भूमिपुत्र

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Image Credit: Internet

भूमिपुत्र

मेरे देश में अब भी कृषक

भूखे पेट सोता है

हत्यारे कर्ज के बोझ तले वह

बिलख बिलख कर रोता है 

 

सरकारें आती हैं

सरकारें जाती हैं

उनकी वयथा फिर भी

जस की तस रह जाती हैं

 

हमे शर्म नहीं क्यों आता जब

खुद को हम कृषि प्रधान देश कहते हैं

कृषकों के नाम पर  राजनीति करके

नेता केवल अपनी जेब भरते हैं

 

डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनेगा

इंजीनियर का बेटा खुद को इंजीनियर कहेगा

पर कृषकों की यही व्यथा रही तो

देश में न कोई भूमिपुत्र बचेगा

 

तो क्या सॉफ्टवेयर हम खायेंगे ? 

या बढ़ते हुए GDP का गुण जाएंगे ? 

या डेवलपिंग कंट्री के तमगे से  

खुद को सांत्वना देते रह जायेंगे

……….अभय…….