भूमिपुत्र

भूमिपुत्र मेरे देश में अब भी कृषक भूखे पेट सोता है हत्यारे कर्ज के बोझ तले वह बिलख बिलख कर रोता है    सरकारें आती हैं सरकारें जाती हैं उनकी वयथा फिर भी जस की तस रह जाती हैं   हमे शर्म नहीं क्यों आता जब खुद को हम कृषि प्रधान देश कहते हैं कृषकों... Continue Reading →

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