मोरा मन..

घट-घट का पानी हमरे गले उतर आया

सिर पर पड़ी कईयन पेड़ की छाया

पर हमरे समझ ये नहीं आया

काहे तोहरे पर ही आ के, मोरा मन भरमाया   🙂

@अभय

Advertisement

16 thoughts on “मोरा मन..”

    1. Thank You!
      Having dearth of time 😦 and the desire to connect frequently with fellow bloggers prompts me write in bits and pieces. However, you are right, even if it will take time, I should come up with a complete poem.
      Thank You for Your input.

      Liked by 1 person

  1. बहुत खूब अभय जी –गहराई भरी–उम्दा!
    गणित और विज्ञान भी,
    हमरा ना फांस पाया,
    कइसनो एग्जाम मन,
    कठिन ना जान पाया,
    फिर ये कैसी विद्या तोहरी,
    जिसमे मन भरमाया।
    फूल ना लुभाया हमें,
    कांटे ना डरा पाया,
    कैसी ये राह जामे,
    मेरो मन भरमाया।

    Liked by 3 people

    1. कईयन मतलब अनेकों
      भरमाया मतलब मोहित होना
      आशा है कि अर्थ स्पष्ट हो गया हो

      Like

      1. एकर अरथ समझ में ना आवथह। अर्थात हमको भोजपुरी बोलने तक समझ में आया उसके बाद क्या कहना चाहते हैं समझ में नहीं आया अभय जी।

        Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: