प्रकृति पुकारती

प्रकृति पुकारती

गंगा हुई गन्दी
यमुना मैली
मैला हुआ धरती का आँचल
शोषण के रुदन क्रंदन से
फ़ैल गया आँखों का काजल

मुरझाये कुसुम
पीले परे पत्ते
सूखी, सारी शाखायें
वन विवश हो विनती करता
निरीह दृष्टि हमपर टिकाये

हम  निशब्द निरुत्तर
निश्चिंत बने बैठे
कहते, ये तो यूँ ही चलता है
शोषण के विरुद्ध जो न आवाज़ उठाये
उसका हश्र यही होता है

आवाज़ उठाएगी धरनी तो क्या
उसका दंश सह पाओगे
धरती के हश्र की बातें करते हो
समूल नष्ट हो जाओगे
और, फिर कुछ नहीं कर पाओगे

………अभय………

 

सच..

 

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Credit: Google Image

यदि आपका चुना हुआ रास्ता “सत्य-आधारित” है, तो उसपर बढ़ते रहिये. कोई साथ आये न आये. पहचान मिले न मिले. सम्मान हो न हो. कष्टों का अम्बार क्यों न लगे. रुकिए मत.

मगर यदि आपका चुना वही रास्ता झूठ और फरेब की बुनियाद पर टिका हुआ है, तो आपकी हार भी निश्चित होनी ही चाहिए और हो कर रहेगी. हार और जीत सापेक्षिक (relative) है, वरन सत्य शास्वत(eternal) है. वह मार्ग जो सत्य के विपरीत है, उसपर चलने से यदि आपको सफलता मिलती है तो समाज के लिए यह घातक है. न्याय और नीति से लोगों का विश्वास उठेगा. नैतिकता प्रशांत सागर (Pacific Ocean) के गर्त में जा गिरेगी.

अब प्रश्न यह उठेगा कि सत्य क्या है और और असत्य क्या? यह कौन तय करेगा?

मैं आपसे पूछता हूँ, कि क्या आप नहीं जानते कि सत्य क्या है? क्या जब आपने असत्य के मार्ग को पहली बार चुना था तो आपकी अंतरात्मा ने आपको नहीं झकझोरा था? आप जितने दफ़े अंतरात्मा की आवाज़ को दबाएंगे, धीरे धीरे उसकी आवाज़ दबती चली जाएगी और अंत में हो जाएगी मौन.

सत्य को समझकर, असत्य को प्रारम्भ में ही तिलांजलि दे दीजिये. फिर अंतरात्मा की आवाज़ और प्रगाढ़ होगी.

और लोगो से सुना भी है कहते हुए कि “अंतरात्मा की आवाज़ में ही परमात्मा की आवाज़ होती है

Whats happening in US

Hello friends!

Diversity brings different ideas on table, different tastes in food plates, different festivals to celebrate and different cloths to wear and so on so forth. But, if it is not nurtured well, it also brings myriad conflicts, hostilities and divides in the society.

Diversity in India is well known. Diversity in India, in terms of culture, religion, castes, language, ethnicity, food, dressing sense etc. is incomparable in world. But at many times we hear, these divides causing much of the disturbance in society. Some time the disturbance due to these divides is comprehended at such an extent that a prominent Actor in Bollywod was told by her wife to “settle in other country as intolerance is on rise in India”!!!

America is seen as the paradise by many Indians. The democratic values, personal liberty, freedom of press, secularism and tolerance have attracted many of us to that place. One of the prime motive or desire of many, if not all, software engineers working in IT firm is always to have an onsite opportunity in US!

But the ideals are not practical. Recently some of the events in US have suggested that their society, although having less diversity than India, is also grappling with some serious issues related to ethnicity, communalism and racial discrimination.

Charlottesville, Virginia incident:

US
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If you are having a close or even a partial eye on world news affair, you may have came across Charlottesville incident, where a white supremacist (A philosophy according to which white is supreme) rammed his car on a peaceful African American demonstrator against Confederacy Symbols. In that incident a woman got killed and more than 20 incurred major and minor injuries.

What is Confederacy Symbol and why African Americans were protesting against it?

To explain the story, you have to travel with me in history and to the American Civil War!!! I assure you, travelling in history will not be as boring as you may think.

So, American Civil War, a watershed moment in the history of US, has started in 1861 and ended in 1865. Abraham Lincoln was the president of US at that time. He had proposed a legislation, according to which the slavery (most of the slave were African American) would be annulled and  be termed as illegal and hence punishable. But many of the southern states of US were not happy of this decision. They have a certain notion that white is supreme and blacks are meant to be slaved. Apart from this there were some economical factors were also associated with their discontent. Slaves provided very cheap labor and hence profitable businesses. So 11 of the southern state formed a confederacy and revolted against the union. They seceded from the union in 1861. After that, a civil war had started in US, which finally got ended in 1865, with the victory of the union over confederacy and they were again merged with the union.

So the racial difference between the so called Nationalist American and the African American is deep seated in history. Now after the civil right movement in America, Blacks were legally brought on par with the Whites, but the prejudice is still prevails in American Society.

After the elevation of Mr. Donald Trump as 45th US President, whos is also seen as Right Wing nationalists and pro whites, simmering discontent gets the expression through various means.

One of the demand of the African American people is that in all the southern states, where they got legal protection by law, but the presence of Confederacy Symbols such as monuments, statue, declaration of public holidays, name of the park, name of the streets are on the name of White Supremacist, is not helping the cause of assimilation of the African American in mainstream as they reminds them the suppression by whites.  Naming all these places after white, glorifies their act of brutal repression. These symbols (such as statues) who glorifies the white oppressors, should be removed for once and all.  But the white population thinks that they all were the part of their cultural heritage which they cherishes and they are their source of inspiration, hence it can’t be removed.

So there were protest and counter protest held in Charlottesville. In one of such protest by African American, a White Supremacist, in his 20s, attacked the crowd with his speeding car which resulted, as I mentioned earlier, in killing of a lady and injuring several others.

So the point which I wanted to bring here is that, no country is paradise or perfect. Every country has their own sets of problem. It doesn’t matter that they are developed or developing, western or eastern, above the equator or below the equator differences will be there. So even though we hear so many negative news about the divides in India, we should not get carried away by negativities rather we should bring and use all the means which will bring the peace and harmony in the society.

 

मैं और तुम

the ETERNAL tryst

surajchanda

मैं और तुम

मैं सूरज बन आता हूँ

तुम चंदा बन जाती हो,

तिमिर चीर कर मैं

पास तुम्हारे आता हूँ,

और तुम अपनी छटा

कहीं और बिखराती हो !!!
लाख यत्न कर,

मिलन की आस लिए

बन बादल मैं,

आसमान पर छाता हूँ

तुम बारिश की बन बूंदें

धरती पर उतर आती हो!!!
अनगित तारे सदियों से

देख रहे इस खेल को,

मैं भी हूँ मूक बना

और तरसता, तुमसे मेल को

पर मन में दृढ विश्वास लिए

सोचता हूँ, एक दिन ऐसा भी आएगा
सूरज चंदा साथ में एक दिन

विश्व भ्रमण को जायेगा!!!
बुँदे कहेगी बादल से

कुछ दिन नभ में ही रुक जाते हैं

फिर दोनों मिलकर इकट्ठे

धरती की प्यास बुझाते हैं!!!
…………अभय…………

शब्द सहयोग:

तिमिर: अंधकार या अँधेरा

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अंतिम न्याय

Symbolic
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अंतिम न्याय

ये जहाँ है आपका
मुझपर आरोप भी आपके
है न्यायलय भी आप ही का
और न्यायाधीश भी आप ही के

न कोई गवाह है संग मेरे
और न कोई सबूत बचा है
मेरी दलीलें को रखने को
न कोई वकील रज़ा है

सुना है कोई अदालत है
इन सब अदालतों से ऊपर
और कहीं निष्पक्ष भी
अंतिम हाज़िरी सबको वहीं लगानी है

मेरा कर्म ही बनेगा मेरी गवाही
और मेरा सबूत भी
वहाँ फरेब की न कोई गुंजाइश बचेगी
शायद, अंतिम न्याय मुझे वहीं मिलेगी

 

……….अभय………

रिमिक्स “रस” :-D

नमस्ते दोस्तों!

कविता या पद्य लेखन में विविध रस होते हैं, जैसे श्रृंगार रस, वीर रस, हास्य रस, शांत रस, भयानक रस, वीभत्स्य रस आदि..
यद्यपि मैं बहुत साधारण कविता लिख पाता हूँ, पर मेरा प्रयास रहता है कि इनमें विविधता रहे. मेरे द्वारा लिखी गयी श्रृंगार रस की कविता (जिसमें मिलन और विरह दोनों आते हैं) का उदाहरण अनायास ही नहीं..3 , कुछ और.. , धीरज … ; हास्य रस का उदहारण हँसना मत भूलिये…. 😉 ; करुण रस का उदाहरण भूमिपुत्र , भक्ति रस का उदाहरण स्मरण अदि हो सकता है

सामन्यतः मैं कविताओं को पहले खुद तक सीमित रखता या एक दो करीबी दोस्त होते थे उनको सुनाता था, परन्तु आजकल वर्डप्रेस के माध्यम से आप तक पहुँचाना अच्छा लगता है क्योंकि आपसे प्रेरणा और प्रोत्साहन दोनों मिलते हैं

जो लोग कवितायेँ लिखते होंगे या जिनकी इसमें रूचि होगी, वो इस बात से सहमत होंगे कि कवितायेँ महज़ शब्दों का खेल नहीं वरन भावनाओं का उफ़ान होता है. कवितायेँ कैसी लगी; यह सामने वाले की भावनाओं पर भी निर्भर करता है. मेरे साथ तो कई बार ऐसा हुआ है कि जब मैंने एक ही कविता को दो अलग लोगों को सुनाया या दो अलग अलग लोगों ने पढ़ा, तो उनकी प्रतिक्रिया में जमीं आसमान का अंतर था
मैंने सोचा कि इसकी वजह क्या हो सकती है. इसके अलग अलग कारण हो सकतें हैं. पर सबसे प्रमुख कारण यह समझ आया कि भावनात्मक रूप से लोगों का विकास अलग अलग स्तर पर होता है. कोई गहराई में डूबकर सोचते हैं तो कोई छिछले स्तर पर..और उसी के आधार पर आंकलन कर पाते हैं..

खैर यह विविधता भी बहुत आवश्यक है, नहीं तो डीजे वाले बाबू मेरा गाना चला दो..या इस तरह के कर्णप्रिय गाने अस्तित्व में नहीं आ पाते 😛

एक मज़ेदार घटना साझा करता हूँ. हुआ यूँ कि एक दोस्त को न जाने कहाँ से पता चल गया कि मैं कविता लिखता हूँ तो उसने सुनाने का अनुरोध किया. मैंने ना-नुकुर के बाद उससे पूछा कि कौन से रस कि कविता सुनोगे. उसने रूचि के साथ पूछा कि ये “रस” क्या होता है, तो मुझे जितना पता था उसको संक्षेप में बताया. उसने झट से कहा “अरे! ये भी कोई पूछने वाली बात थी, इस उम्र में तो श्रृंगार रस की ही कविता सुनने का मज़ा है”. मैंने मन ही मन सोचा, लगता है इसे “रस” का मतलब बराबर समझ आया 😀
तो मैंने उसे अपनी कविता सुनाई
उसने कहा “वाह यार, अच्छा लिख लेते हो”. मैंने भी धन्यवाद कहा, और कहना भी चाहिए. फिर उसके बाद उसने जो कुछ कहा, जो मैंने कभी सुना नहीं था और हंसी भी आयी…

जानते हैं उसने क्या कहा “अरे यार, कोई ऐसे कविता सुनाओ जो रीमिक्स हो, जिसमे श्रृंगार रस भी हो और वीर रस भी” 😀
मैं सोचा कि अब समझ आया कि उसको “रस” के बारे में कितना समझ आया 🙂
मैंने कहा कि “भाई, मैंने तो ऐसे कविता लिखी नहीं है” उसने कहा कि “कैसे कवि हो, नहीं लिखी तो अभी अभी लिख दो “. मैंने कहा “अरे मैं वैसा भी कवि नहीं हूँ कि झट-पट लिख दूँ, मैं परिस्थितिजन्य कवि हूँ, चीजें मन को छूती है, तो शब्द बाहर आते हैं”. उसने फिर कहा चार लाइन तो बना ही सकते हो
मैंने भी सोचा कि चलो कोशिश की जाये, चार मिनट कि चुप्पी के बाद ये चार पंक्तियाँ बाहर आयी, सुनकर वह हंसा और मैं पढ़ने के बाद ठहाकों में फुट पड़ा…

आप भी “रीमिक्स रस” (श्रृंगार + वीर) का आनंद ले सकते है 😀 और तनाव भरे जीवन में मुस्कुरा सकते हैं..

मेरा प्रेम कोई रेत नहीं जो
हाथों से तेरे फिसलेगा
यह तो वह अनंत सागर है जो
समूचा ही तुम्हे निगलेगा

😀 😀 😀