मैं और तुम

the ETERNAL tryst

surajchanda

मैं और तुम

मैं सूरज बन आता हूँ

तुम चंदा बन जाती हो,

तिमिर चीर कर मैं

पास तुम्हारे आता हूँ,

और तुम अपनी छटा

कहीं और बिखराती हो !!!
लाख यत्न कर,

मिलन की आस लिए

बन बादल मैं,

आसमान पर छाता हूँ

तुम बारिश की बन बूंदें

धरती पर उतर आती हो!!!
अनगित तारे सदियों से

देख रहे इस खेल को,

मैं भी हूँ मूक बना

और तरसता, तुमसे मेल को

पर मन में दृढ विश्वास लिए

सोचता हूँ, एक दिन ऐसा भी आएगा
सूरज चंदा साथ में एक दिन

विश्व भ्रमण को जायेगा!!!
बुँदे कहेगी बादल से

कुछ दिन नभ में ही रुक जाते हैं

फिर दोनों मिलकर इकट्ठे

धरती की प्यास बुझाते हैं!!!
…………अभय…………

शब्द सहयोग:

तिमिर: अंधकार या अँधेरा

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30 thoughts on “मैं और तुम

    1. शुक्रिया मधुसूदन भाई ,
      नए पाठकों से जुड़ाव रहे इसलिए अपनी पुरानी कृति को वापस प्रस्तुत कर देता हूँ, शुक्रिया की आपने दुबारा समय दिया …

      Like

  1. pkckd1989

    बहुत ही खूबसूरत लिखा आपने अभय जी। दोनों भले ही अलग हो पर जब कुछ अच्छा करना हो तो अंततः एक हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही तो रिश्ता है हम सबका भी हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं जिससे ना मात्र हमें अच्छा लगता हैं बल्कि हम किसी को अंजाने ही मार्ग दिखा देते हैं। हंसते हैं तो कभी कितना कुछ सीखा जाते हैं।

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    1. I just tried to draw a parallel. Nature and Humans are to different entity. Humans are part of nature, we can’t say vice versa. Being a part of nature, humans exhibits some traits which are familiar to that of surrounding.

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    1. हा हा. जब मैंने इसे पहली बार लिखा और अपने ब्लॉग पर प्रकाशित किया, तो नये होने के कारण बहुत लोगों ने भाव नहीं दिया 😜😜
      इसलिए आप सबके समक्ष दोबारा लाया! 😀

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  2. Wow..
    I started thinking that no one in our is bothered to write or read in hindi anymore but here I found myself totally wrong and I’m so glad about it🙂
    I will congratulate you for contributing to our national language and that too in such a great way..very well written and I loved it 🙂

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    1. Thanks Nidhi for your kind and encouraging words.
      As far as Hindi is concerned, it’s not that no one is bothered about Hindi. If you check seriously, due to penetration of IT enabled platforms, a lot of exciting things is happening around in Hindi. Here in WordPress you will get many Stories, Poetries, Narration etc in Hindi Language.
      As far as my choice of Hindi, as a mode of expression, is concerned there are two driving factors
      1. भावनायें अंग्रेजी में आती नहीं
      2. अंग्रेजी भी टूटी फूटी आती है 😅

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