जाने क्यों ?

जाने क्यों ?

 

तुम दीपक की लौ सी सुलगती हो

जाने क्यों

मैं मोम सा पिघलता हूँ!

 

तुम बारिश में मचलती हो

जाने क्यों

मैं हर दो कदम पर फिसलता हूँ!

 

तुम बिजली सी चमकती हो

जाने क्यों

मैं तड़ित चालक बनता हूँ!

 

तुम बिन कहे सब कह जाती हो

जाने क्यों

मैं चीखकर भी मौन रहता हूँ!

 

…….अभय……

 

शब्द सहयोग:

तड़ित चालक: Lightening arrester; its used as a tool which  arrest or capture lightening yet doesn’t store it, rather let it pass through itself in to the ground. Now use it in context of the poem, do you find any relevance 🙂

पढ़ने के लिए शुक्रिया….

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30 thoughts on “जाने क्यों ?”

  1. क्या बात—–तड़ित चालक —लाजवाब शब्द अभय जी—–
    तूँ बारिश की बूंद,
    जाने क्यों,
    मैं धूल सा लिपट जाता हूँ,

    तेरी रफ्तार में,
    जाने क्यों,
    अपनी रफ्तार भूल जाता हूँ,

    जाने क्यों,
    तुमसे

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    1. नवमी या दसवीं में कहीं तो पढ़ा था यह शब्द विज्ञान में। उपयोग में आज लाया 😁
      शुक्रिया आपका मधुसूदन जी!

      Liked by 1 person

    1. हा हा, बहुत जटिल है भाई साहब!!!
      आप सा तो नहीं लिखता, पर अनुरोध है की मेरी एक कविता “अपनी राह” पढ़कर बताइये की कैसी लगी

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