ख़त

ख़त

बिन तेरे, अब ये घर मुझे
है काटने को दौड़ता
पर फिर भी मैं
अपना पता नहीं बदलता हूँ
कि कहीं किसी दिन
तेरा ख़त, मुझे ढूंढते इसी पते पर न आ जाये
और किसी अजनबी या लटके ताले को देख
हो मायूस, वापस न लौट जाए

~अभय

अब आप कहोगे कि भाई, आजकल ये खत कौन लिखता है. तो आप जानते ही हैं कि मैं क्या कहूँगा, नहीं जानते? अरे मैं कहूँगा कि आप खत को छोड़ मोबाइल नंबर को ही ले लीजिये शायद वही रेलिवेंट लगे 😉

 

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26 thoughts on “ख़त”

      1. The foonote to be particular 😁 But to be honest all your writings especially hindi one’s are beautiful and I really appreciate them.Great Job 👍👍

        Liked by 1 person

  1. खत आएगा कि नही हम नही जानते,
    फिर तुमपर ऐतबार करते हैं,
    क्या करें कमबख्त प्यार ही ऐसा है,
    तेरा इंतेज़ार करते है।

    Liked by 1 person

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