वो रास्ता..

Blast From the Past…

the ETERNAL tryst

contemplation Credit: Internet

वो रास्ता..

सच्चाईयों से मुँह फेरकर,

मुझपर तुम हँसते गए

दल-दल राह चुनी तुमने,

और गर्त तक धसते गए


खुद पर वश नहीं था तुम्हें ,

गैरों की प्रवाह में बहते गए

जाल बुनी थी मेरे लिए ही,

और खुद ही तुम फँसते गए


नमी सोखकर मेरे ही जमीं की,

गैरों की भूमि पर बरसते रहे

सतरंगी इंद्रधनुष कब खिले गगन में,

उस पल को अब हम तरसते रहे

……….अभय ………..

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28 thoughts on “वो रास्ता..”

  1. bahut hi khubsurat rachna Bhayee ji……..

    थी हमें भरोसा,छोड़ गए,
    सच्चाई से मुंह मोड़ गए,
    थी राह सजी जो दलदल से,
    वे उससे रिश्ता जोड़ गए,
    अब कहाँ धरा पर खुशियां हैं,
    ना इंद्रधनुष की छटा वहाँ,
    हम तरसते हैं यहाँ खड़े,
    वे आज तड़पते छोड़ वहाँ,

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