सशर्त प्रेम …

lb

नेह अगर है मुझसे तो बोलो

तुम क्या क्या कर सकते हो

जान ले सकते किसी की

या अपनी जान दे सकते हो ?

 

निष्ठा को साबित करने को

मैंने भी मन में ठान लिया

निज प्राणाहुति हेतु

तलवार गले पर तान लिया

 

तभी कुटिल मुस्कान लिए

उसने मुझसे बोला

अपने अप्रत्यासित अनुरोध का

राज़ था उसने खोला

 

“मुझे तो बस ये देखना था

तुम किस हद तक जा सकते हो

मेरे लिए क्या तुम अपना

सर्वस्व त्याग कर सकते हो”

 

तलवार गले पर था मेरे

तब भी न कोई टीस थी

निष्ठा को सत्यापित करना पड़ा

ये यातना बड़ी गंभीर थी

…….अभय……

P.S. Tried writing something new in different genre, please let me know does it make sense to you! Thank You.

Advertisements

27 thoughts on “सशर्त प्रेम …”

  1. बहुत खूब भाई जी।👌👌

    लेनेवाले सिर्फ लेना जानते हैं,
    वे प्रेम समर्पण क्या जाने,
    देनेवालों ने कब संकोच किया है,
    वे प्रेम के आगे
    अपनी जान की भी कीमत ना जानें।

    Liked by 1 person

            1. Well.. let me try, but am not sure that will I be able to evoke same feeling as I could have done if you would have perceived it in Hindi 🙂 Anyways, the title of the poem is “Conditional Love”. The plot is that a girl asks his beloved that if he really loves her, then to which extremes can he go? For her, can he take the life of others or if situation demands can he relinquish his own life?
              To prove his genuineness, the boy immediately put his sword around his neck and was readying himself for sacrifice, but girl smiles and says that’s enough! I asked just to check your loyalty.
              In last stanza the boy thinks he didn’t had any fear or tinge of pain when he had his sword around his neck, but the anguish that he had to prove his commitment was unbearable for him.

              Hope it made sense to you!

              Liked by 1 person

  2. धन्यवाद अभय जी बताने के लिए मुझे जो समझ में नहीं आता है वो पूछना पड़ता है। वैसे पहले वाले से इसे बहुत बेहतर शैली में लिखा कहेंगे इस कविता में लयबद्धता है और बेहतर करने के लिए लास्ट शब्दों में तुक बन्दी यानी तुकान्त शब्दों का प्रयोग और कविता को और खूबसूरत बना देता है। मैं भी लिख तो नहीं पाती पर लोगों को पढ़कर मन खुश हो जाता है कि कोई ऐसे कैसे तुक बंदी कर लेता है तुक बंदी मधुसूदन जी अच्छा कर लेते हैं। आप कम शब्दों में बेहतरीन अर्थ लिख लेते हो और टापिक भी नया होता है जो आपकी विशेषता है। मैं इसलिए बताया कि ध्यान देंगे तो हम लोगों से अच्छा ज्ञान है शब्दों का आपको। यदि बेहतर सीखना है तो यौरकोट दीदी के पोस्ट पर बहुत अच्छे से लिखने का विडियो डाल रखा है मुझे तो अब भूल जाती हूँ याद नहीं रख पाती। शायद आप बेहतर कर सकें।

    Liked by 2 people

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s