संदेह कैसा?


तुम होते हो वही, जो तेरे मन में चलता है

फिर न जाने क्यों ये मन तेरा, पल-पल बदलता है

लक्ष्य दुर्लभ है, पता है.. विपदाओं के बादल भी घने हैं

आशंकाएं कैसी? संदेह कैसा? जब संग स्वयं जनार्दन खड़े हैं




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यदि आपका चुना हुआ रास्ता “सत्य-आधारित” है, तो उसपर बढ़ते रहिये. कोई साथ आये न आये. पहचान मिले न मिले. सम्मान हो न हो. कष्टों का अम्बार क्यों न लगे. रुकिए मत.

मगर यदि आपका चुना वही रास्ता झूठ और फरेब की बुनियाद पर टिका हुआ है, तो आपकी हार भी निश्चित होनी ही चाहिए और हो कर रहेगी. हार और जीत सापेक्षिक (relative) है, वरन सत्य शास्वत(eternal) है. वह मार्ग जो सत्य के विपरीत है, उसपर चलने से यदि आपको सफलता मिलती है तो समाज के लिए यह घातक है. न्याय और नीति से लोगों का विश्वास उठेगा. नैतिकता प्रशांत सागर (Pacific Ocean) के गर्त में जा गिरेगी.

अब प्रश्न यह उठेगा कि सत्य क्या है और और असत्य क्या? यह कौन तय करेगा?

मैं आपसे पूछता हूँ, कि क्या आप नहीं जानते कि सत्य क्या है? क्या जब आपने असत्य के मार्ग को पहली बार चुना था तो आपकी अंतरात्मा ने आपको नहीं झकझोरा था? आप जितने दफ़े अंतरात्मा की आवाज़ को दबाएंगे, धीरे धीरे उसकी आवाज़ दबती चली जाएगी और अंत में हो जाएगी मौन.

सत्य को समझकर, असत्य को प्रारम्भ में ही तिलांजलि दे दीजिये. फिर अंतरात्मा की आवाज़ और प्रगाढ़ होगी.

और लोगो से सुना भी है कहते हुए कि “अंतरात्मा की आवाज़ में ही परमात्मा की आवाज़ होती है

Kasturi Tilkam

Recently I came across a very beautiful Bhajan on Lord Krishna on YouTube. It is in Sanskrit and Pandit Jasraj Ji has given his melodious voice to it.  Although, I knew this Bhajan even before listening it on YouTube, but I knew it as in the form a Verse/Slokas.

In this verse the physical appearance of Lord Krishna is glorified. Although to glorify  the absolute qualities of Lord is beyond capacity of Individual, yet devotees have the legacy to describe Him according to ones realization.

Even without having knowledge of Indian classical music, I consider it very rich than compare to the current trends of Indian Bollywood music. Now a days songs, though they are famous among youth, lack poetic sense, doesn’t have meaning and instruments preoccupy the songs rather than the voice of singer.

In my view,there are some reasons behind the less popularity of classical music among youth as they are unaware of the intricacies of various aspects of it . Apart from this many classical songs, which finds its origin in Sanskrit, are difficult to discern. In the absence of the meaning of songs, people find it tough to retain and enjoy the real hidden beauty. And it is obvious that if we are not able to understand, than it is impossible to appreciate.

So for this Bhajan, I did some research and found multiple sources where the translations as well as meaning of the words were given. I am sharing the meaning of the each words as well as the translation of the verse.

I am also sharing a Link of this Bhajan, which is on YouTube. This Bhajan is part of an album Govind Damodar Madhveti. Each and Every song is a bliss.  Plug in your Ear Phone to get the better sound effect and clarity.

कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं

नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम् 

सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे  मुक्तावलिं

गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते गोपाल चूडामणिः 

Kasturi-Tilakam Lalaatta-Pattale Vakssah-Sthale Kaustubham

Naasa-Agre Nava-Mauktikam Karatale Vennum Kare Kangkannam

Sarva-Angge Haricandanam Sulalitam Kanntthe Cha Muktaavalim

Gopa-Strii Parivessttito Vijayate Gopaala Chuddaamannih

1: Obeisance to Gopala Who is adorned with the Sacred Marks of Kasturi (Musk) on His Forehead and Kaustubha Jewel on His Chest,
2: His Nose is decorated with a new Shining Pearl, the Palms of His Hands are gently holding a Flute, the Hands themselves are beautifully decorated with Bracelets,
3: His Whole Body is Smeared with Sandal Paste, as if Playfully anointed, and His Neck is decorated with a Necklace of Pearls,
4: Surrounded by the Cowherd Woman, Gopala is Shining in their middle in Celebration like a Jewel on the Head.

Meaning of the Words:

कस्तूरीतिलकं (Kastuurii-Tilakam): Marks of Kasturi [Musk] ,

ललाटपटले (Lalaatta-Pattale): On the Surface of Forehead

वक्षःस्थले (Vakssah-Sthale): On the Chest

कौस्तुभं (Kaustubham): Kaustubha Mani obtained during Samudra Manthana

नासाग्रे (Naasa-Agre): On the Nose

नवमौक्तिकं (Nava-mauktikam): New Shining Pearl

करतले (Karatale): On the Palm of the Hand

वेणुं (Vennum): Flute

करे (Kare): On the Hand

कङ्कणम् (Kangkannam): Bracelet

सर्वाङ्गे (Sarva-Angge): Whole Body

हरिचन्दनं (Haricandanam): Yellow Sandal Paste

सुललितं (Sulalitam): Playful, Wanton, Charming

कण्ठे (Kanntthe): On the Neck

च (Ca): And

मुक्तावलिं (Muktaavalim): Pearl of Necklace

गोपस्त्री (Gopa-Strii): Cowherd Woman 1

परिवेष्टितो (Parivessttito): Surrounded by

विजयते (Vijayate): in Victory, Celebration

गोपाल (Gopaala): Gopala, another name of Sri Krishna

चूडामणिः (Cuuddaamannih): The Best or Most Exalted literally meaning the Jewel worn on the Head

Credits: YouTube Link: Dharmaraksha

               Meaning and Translation: Multiple sources, with special mention Greenmesg.org


सूक्ति (Beautiful Thought)

Sanskrit is world’s oldest language. They say “Old is Gold”. But the decline in Sanskrit suggests that we have not valued the Gold. There may be many reasons of its decline. One of the foremost reason was that we remained under the control of foreign rulers for way too long period (nearly 1000 years, isn’t it a very long period ?). Whenever any foreign power reins its subject, their first attack is on the cultural aspects of their occupation and to promote their own culture to the natives.

Anyway I am not going in to the details of the apathy of Sanskrit, because reflection in past never fetches any substantial gain but the present action can, however past can be a chaperone.

Today I am starting a new series in my blog, named “सूक्ति/ Beautiful Thought”

“सू+उक्ति; सू =अच्छा, सुन्दर ; उक्ति = विचार “.

It will consist texts, verses, thoughts, quotes, anecdotes etc. from Sanskrit language with its translation. I will try to write those episodes which will be relevant to our day to day life. The source of my quote will be multiple. Texts may be from Srimad Bhagavad Gita, Bhagwat Puran, Vedas, Upanishad, Quotes from various personalities such as Chanakya.

My purpose is that through this small initiative readers will feel proud about our great heritage and can develop some interest in knowing them. India was known as “Golden Bird” at the time, when Sanskrit was rife. I am not saying that there is some connection between it, but I also believe that it can not be a mere coincident.

Here is the first one ..


संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है. लोग कहते हैं “ओल्ड इस गोल्ड “. लेकिन संस्कृत में गिरावट से पता चलता है कि हमने “गोल्ड” को महत्व नहीं दिया है. इसकी गिरावट के कई कारण हो सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि हम विदेशी शासकों के नियंत्रण में बहुत लंबे समय तक रहे (लगभग 1000 साल, क्या यह बहुत लंबी अवधि नहीं है?)। जब भी किसी भी विदेशी शक्ति ने अपने अधीन पर शाशन करती है तो उनका पहला हमला अधीन के सांस्कृतिक पहलुओं को नाश्ता करना और अपने सांस्कृतिक पहलुओं को उनपर थोपना होता है.

फिर भी मैं संस्कृत की उदासीनता का ब्यौरा में नहीं देने जा रहा हूं, क्योंकि सिर्फ अतीत झाँकने से किसी भी महत्वपूर्ण लक्ष्य की पूर्ति नहीं करता है, लेकिन वर्तमान में काम करने से यह प्राप्त किया जा सकता है, हालांकि अतीत एक सीख का काम कर सकती है

आज मैं अपने ब्लॉग में एक नई श्रृंखला शुरू कर रहा हूं, जिसका नाम रखा है “सूक्ति ” . इसमें संस्कृत भाषा से पाठ, छंद, विचार, उद्धरण, उपाख्यानों आदि शामिल होंगे। मैं उन लेखों को लिखने का प्रयास करूंगा जो हमारे दिन-प्रतिदिन जीवन के लिए प्रासंगिक होंगे। मेरे उद्धरण का स्रोत एकाधिक होगा. ग्रंथों में श्रीमद् भगवद गीता, भागवत पुराण, वेद, उपनिषद, चाणक्य जैसे विभिन्न व्यक्तित्वों से उद्धरण भी हो सकते हैं।

मेरा उद्देश्य यह है कि इस छोटी सी पहल के माध्यम से पाठकों को हमारी महान विरासत के बारे में पढ़कर गर्व महसूस होगा और उन्हें जानने में कुछ रुचि पैदा हो होगी। भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था, जब संस्कृत व्यापक थी। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इसके बीच कुछ संबंध हैं, लेकिन मेरा यह भी मानना है कि यह एक संयोगमात्र नहीं हो सकता।