मूल न भूलें..

During one of my outing, I was fortunate to come across a Banyan Tree. This Banyan Tree was gigantic in size and seemed antiquated. Though I have seen many Banyan trees with multiple prop roots, but after seeing the sheer size and spread of this wood I became mesmerized. I sat down under the Banyan …

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2012 to 2018: Same Story

2012 की शोरगुल, हल्ला गुल्ला, प्रतिरोध, प्रदर्शन, रोष, एकजुटता सबकुछ मेरे मानस पटल पर आज भी अंकित है. मैं भूला नहीं. कारण यह कि शायद 2012 आते-आते मेरी संवेदनशीलता अपना स्वरुप ग्रहण करने लगी थी. उस घृणित कृत की पुरजोर भर्त्स्ना कुछ इस कदर हुई थी कि मुझे लगा कि यह भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक …

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Being Lakshman

So, when demon Marich came in a disguise of a magnificent golden deer and roamed around the hermit, where Lord Ram, Sita and Lakshmana were staying, Sita immediately became magnetized by seeing her beauty. She made a request to Lord Ram that she is so moved by the exquisiteness of that deer that she wants …

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जाल ..

"मानव ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ रचना है" एक वक्ता को जैसे ही मैंने कहते हुए सुना, मन में सैकड़ो ख्याल सरपट दौड़ने लगे. अब क्या कहूँ, कोई योगी तो हूँ नहीं कि एक बार में एक ही ख्याल से मनोरंजन कर सकूँ या विचारशून्यता की सतत स्थिति में रहकर परम आनंद का अनुभव ले सकूँ! …

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अपना शहर ..

आज वर्षों बाद फिर से मैं तेरे शहर को आया वो सारी गालियाँ थी पहले सी पर घर कुछ बदला-बदला सा पाया कुछ वृक्षों से पुरानी दोस्ती थी वे झूम झूम कर लहराए उनमे से तो कुछ ने स्वागत में मुझ पर अपने पत्ते भी गिराए सोचा कि तुमसे मिलूंगा कई सतहों में थी जो दबी, …

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मुर्दों की बस्ती..

        मुर्दों की बस्ती मोल लगा लो पैसे हों तो यहाँ ईमान बहुत ही सस्ती है ये मुर्दों की बस्ती है   शुचिता के सब स्वांग रचे हैं पर, बिकी हुई हर हस्ती है ये मुर्दों की बस्ती है   कलंक का डर अब किसे यहाँ पर स्वाभिमान गर्त तक धसती है …

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सुलगती ज्वाला

सुलगती ज्वाला सुलगती ज्वाला, जन जन के मन में और तुम उसे ढकने चले वो भी, सूखे घास और पत्तों से नमी रहित कागज के टुकड़ों से फेकीं गयी कपड़ों के चिथड़ों से सूखे आम की डालों से शुष्क सागवान की छालों से उस दहकते अंगारों को ढक कर निश्चिंत होकर तुम बैठ गए अरे!!! …

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