Meandering

P.S. This is Swarnrekha River, Originates at Ranchi Plateau passes through my Hometown and finally merges in Bay of Bengal.

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मेरा मन..

  मेरा मन जहाज़ सा, उड़ने वाला नहीं तैरने वाला, पानी का जहाज और तुम सागर सी, हिन्द महासागर नहीं प्रशांत महासागर अथाह, असीमित, अन्नंत मन चंचल था मेरा, तैरता तुममें कभी शांत कभी हिचकोले करता हुआ पर वह अब डूब रहा है गर्त में, तह तक जैसे किसी सागर में कोई जहाज डूबता है, …

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खुला पिंजरा

      तूने वर्षों तक पिंजरें में मुझे जो कैद किया और फिर कहके कि बड़प्पन है "मेरा"  जाओ तुम्हें आज़ादी दी और पिंजरे को फिर से खोल दिया अब जब आदत हो चली इस पिंजरे की और उड़ना भी मैं भूल गया तो ये खुला पिंजरा भी क्या कर पायेगा जो उन्मुक्त नभ …

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ओ मेघा !

  ओ मेघा ! अलग सी प्रतीक्षा, अलग सा समां है है आने को मेघा, सभी हर्षित यहाँ हैं ओ मेघा! इस बार मेरे छत के ऊपर तुम आकर केवल मत मंडराना जो दूर से आये हो तुम लेकर उस जल को हम पर बरसाना सूखी जमीं है, सूखा है तन पीले पड़े पत्ते, रूखा …

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वो पल …..

वो पल  ..... वो पल फिर से आया है जब चाँद धरा पर छाया है भँवरों ने गुन गुन कर के आकर तुम्हें  जगाया है बारिश की बूंदें छम छम कर तन को देखो भींगो रही ठंडी बसंती हवा चली भीगे तन को फिर से सुखा रही कोयल बैठ बगीचे में स्वागत गीत है सुना रही …

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