2012 to 2018: Same Story

2012 की शोरगुल, हल्ला गुल्ला, प्रतिरोध, प्रदर्शन, रोष, एकजुटता सबकुछ मेरे मानस पटल पर आज भी अंकित है. मैं भूला नहीं. कारण यह कि शायद 2012 आते-आते मेरी संवेदनशीलता अपना स्वरुप ग्रहण करने लगी थी. उस घृणित कृत की पुरजोर भर्त्स्ना कुछ इस कदर हुई थी कि मुझे लगा कि यह भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक …

Continue reading 2012 to 2018: Same Story

Advertisements

Being Lakshman

So, when demon Marich came in a disguise of a magnificent golden deer and roamed around the hermit, where Lord Ram, Sita and Lakshmana were staying, Sita immediately became magnetized by seeing her beauty. She made a request to Lord Ram that she is so moved by the exquisiteness of that deer that she wants …

Continue reading Being Lakshman

जाल ..

"मानव ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ रचना है" एक वक्ता को जैसे ही मैंने कहते हुए सुना, मन में सैकड़ो ख्याल सरपट दौड़ने लगे. अब क्या कहूँ, कोई योगी तो हूँ नहीं कि एक बार में एक ही ख्याल से मनोरंजन कर सकूँ या विचारशून्यता की सतत स्थिति में रहकर परम आनंद का अनुभव ले सकूँ! …

Continue reading जाल ..

Lowdown of Simultaneous Election

When it comes to the celebration of festivals, probably no other country in the world can beat us in terms of sheer numbers which we have here in India. The dates of our annual calendar are always filled with colours, signifying one festival or the other. Festivals are generally a cultural and historical attribute of …

Continue reading Lowdown of Simultaneous Election

एक और दिसंबर बीत गया..

एक और दिसंबर बीत गया अभी तो सूरज निकला ही था और झट में फिर वो डूब गया एक और दिसंबर बीत गया अभी बसंत की हुई थी दस्तक पर अब, पत्ता पत्ता सूख गया एक और दिसंबर बीत गया जनवरी में कई कस्में खायी थी हमने पर अगणित बार वो टूट गया एक और …

Continue reading एक और दिसंबर बीत गया..

सुलगती ज्वाला

सुलगती ज्वाला सुलगती ज्वाला, जन जन के मन में और तुम उसे ढकने चले वो भी, सूखे घास और पत्तों से नमी रहित कागज के टुकड़ों से फेकीं गयी कपड़ों के चिथड़ों से सूखे आम की डालों से शुष्क सागवान की छालों से उस दहकते अंगारों को ढक कर निश्चिंत होकर तुम बैठ गए अरे!!! …

Continue reading सुलगती ज्वाला

रेस्टोरेंट का खाना ..

उम्र 13-14 की होगी. नीचे से उसके शर्ट के दो-तीन बटन टूटे हुए थे, जब वह दौड़ कर अपने पिताजी की तरफ़ आ रहा था तो हवा में उसकी शर्ट फैलने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे आकाश में कोई विशालकाय पक्षी अपना पंख फैलाये उड़ रहा हो. पावों में चप्पलें तो थी, पर मटमैली …

Continue reading रेस्टोरेंट का खाना ..