विडंबना..

वो झूठ था मैं जानता था पर, सच को न जानने की ढोंग मैं करता रहा काश! मेरे उस ढोंग को तुम जान लेते मेरे हर झूठे हँसी में छिपे आह को , तुम पहचान लेते और अब जब कि वर्षों बाद तुमने ये जान लिया है कि मैं वो सच जानता था तो विडंबना …

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Pass it on..

A good leader is one, who doesn’t always leads from the front, but when the time demands he is ready to operate from the back as well. Those leaders, who are insecure about their position never wants to relinquish his frontal space, as they always have a doubt in back of their mind that if …

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मेरा मन..

  मेरा मन जहाज़ सा, उड़ने वाला नहीं तैरने वाला, पानी का जहाज और तुम सागर सी, हिन्द महासागर नहीं प्रशांत महासागर अथाह, असीमित, अन्नंत मन चंचल था मेरा, तैरता तुममें कभी शांत कभी हिचकोले करता हुआ पर वह अब डूब रहा है गर्त में, तह तक जैसे किसी सागर में कोई जहाज डूबता है, …

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जिद्दी मन..

  पावों में हैं बेड़ियाँ हाथों में है पाश मैं खड़ा जमीं पे पर, दृष्टि में आकाश सुविधाएँ तो थी नहीं साधन भी मुझे मिला नहीं दर-दर की ठोकरे खायीं पर, किसी से कोई गिला नहीं सब कहते हैं, भाग्य में हो जितना केवल, उतना ही तो मिलता है पर करें क्या कि, जिद्दी है …

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