Right?

Now, I am low

and you are at height

but that doesn’t make you

absolutely right. 

                                                                                                              ~Abhay

 

ओ मेघा !

 

Cloud
Clouds are building up in my city, Clicked it in the morning. A place, from where I love watching rains

ओ मेघा !

अलग सी प्रतीक्षा, अलग सा समां है

है आने को मेघा, सभी हर्षित यहाँ हैं

ओ मेघा!

इस बार मेरे छत के ऊपर

तुम आकर केवल मत मंडराना

जो दूर से आये हो तुम लेकर

उस जल को हम पर बरसाना


सूखी जमीं है, सूखा है तन

पीले पड़े पत्ते, रूखा है मन

ओ मेघा!

इस बार तुम अपनी भीषण गर्जन से

तुम हमे केवल मत डरना

जो दूर से आये हो तुम लेकर

उस जल को हम पर बरसाना


नदियां भी प्यासी, कुँए हैं प्यासे

बूंदों को तरसते, हम भी ज़रा से

ओ मेघा !

इस बार अपनी बिजली की चकाचौंध से

तुम आतिशबाज़ी केवल मत कर जाना

जो दूर से आये हो तुम लेकर

उस जल को हम पर बरसाना

…..अभय….

कुछ और..

कुछ और..

im
Credit: Internet

कुछ और नहीं मन में मेरे

बस मिलने को आ जाता हूँ

मत पूछो तेरी यादों में

मैं क्यों घर बसाता हूँ


मिलते ही तेरी आँखों से

आँसू झर-झर बहते हैं

लोग कहे उन्हें पानी,  मुझे वो 

मोती ही लगते हैं


अगणित रातों में जब-जब

नींद तुम्हे न आती हो

मेरी क्या गलती है उसमें, जो तुम

दोषी मुझे बताती हो


माना अपना दूर शहर है

मंज़िल भी नहीं मिलती है

मेरी आँखों में झाँक के देखो

तुमसे वो क्या-क्या कहती है


तिमिर चीरने के खातिर

मैं एक  दीया जलाता हूँ

मत पूछो तेरी यादों मैं

मैं क्यों घर बसाता हूँ

……अभय……