Tricolour

“Independence”, thought of writing about it, but later changed my mind and now just sharing some of the Clicks of Tricolour which I have captured. As every one should have the freedom to interpret FREEDOM, in their own way! Happy Independence Day!

मैं और तुम

the ETERNAL tryst

surajchanda

मैं और तुम

मैं सूरज बन आता हूँ

तुम चंदा बन जाती हो,

तिमिर चीर कर मैं

पास तुम्हारे आता हूँ,

और तुम अपनी छटा

कहीं और बिखराती हो !!!
लाख यत्न कर,

मिलन की आस लिए

बन बादल मैं,

आसमान पर छाता हूँ

तुम बारिश की बन बूंदें

धरती पर उतर आती हो!!!
अनगित तारे सदियों से

देख रहे इस खेल को,

मैं भी हूँ मूक बना

और तरसता, तुमसे मेल को

पर मन में दृढ विश्वास लिए

सोचता हूँ, एक दिन ऐसा भी आएगा
सूरज चंदा साथ में एक दिन

विश्व भ्रमण को जायेगा!!!
बुँदे कहेगी बादल से

कुछ दिन नभ में ही रुक जाते हैं

फिर दोनों मिलकर इकट्ठे

धरती की प्यास बुझाते हैं!!!
…………अभय…………

शब्द सहयोग:

तिमिर: अंधकार या अँधेरा

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अंतिम न्याय

अंतिम न्याय ये जहाँ है आपका मुझपर आरोप भी आपके है न्यायलय भी आप ही का और न्यायाधीश भी आप ही के न कोई गवाह है संग मेरे और न कोई सबूत बचा है मेरी दलीलें को रखने को न कोई वकील रज़ा है सुना है कोई अदालत है इन सब अदालतों से ऊपर और कहीं... Continue Reading →

रिमिक्स “रस” :-D

नमस्ते दोस्तों! कविता या पद्य लेखन में विविध रस होते हैं, जैसे श्रृंगार रस, वीर रस, हास्य रस, शांत रस, भयानक रस, वीभत्स्य रस आदि.. यद्यपि मैं बहुत साधारण कविता लिख पाता हूँ, पर मेरा प्रयास रहता है कि इनमें विविधता रहे. मेरे द्वारा लिखी गयी श्रृंगार रस की कविता (जिसमें मिलन और विरह दोनों... Continue Reading →

When Your Post Is Not Delivered

Hello Friends,
I came across an amazing piece of story narration , Which contains tragedy, hope, pain, agony etc. It is written by Amit Mishra Sir!
Do read and let me know that how did you feel post reading.

Pradyot

11357671284_3c225b66a3_nI am writing to you after a long gap. A sudden unanticipated inflow of work kept me occupied for the last two weeks. Such unexpected change in work schedule is part of scientific research. The work is not yet finished, but now I am getting used to the extra work. It also means that a lot of routine work has piled up — cleaning, organizing, refreshing social contacts, and yes, getting updated with what is going on in the world. So I sat down and browsed through the large pile of newspapers looking for anything interesting that I might have missed.

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मोरा मन..

घट-घट का पानी हमरे गले उतर आया सिर पर पड़ी कईयन पेड़ की छाया पर हमरे समझ ये नहीं आया काहे तोहरे पर ही आ के, मोरा मन भरमाया   🙂 @अभय

Caption it

When I clicked this image, I was quite enthusiastic to share it on my blog, as I found it very interesting. However, when I tried to give a caption to it,  numerous parallel thoughts  came in my mind, but none of them did  justice to it. So I thought of sharing it and throw it... Continue Reading →

आम खरीद कर ही खाएँ :-P

आम का मौसम अपने चरम पर है. तो आज जैसे ही मन्नू ने बताया कि गुप्ता जी अपनी बेटी को लाने 10 बजे स्टेशन जायेंगे, तो हम चार पांच मित्र काफी खुश हुए. पर मोहन ने संदेह भरी निगाह से मन्नू को देखा और पूछा "अबे मन्नू !!ये बता, गुप्ता जी 10 बजे अपनी बेटी... Continue Reading →

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