सुलगती ज्वाला

सुलगती ज्वाला सुलगती ज्वाला, जन जन के मन में और तुम उसे ढकने चले वो भी, सूखे घास और पत्तों से नमी रहित कागज के टुकड़ों से फेकीं गयी कपड़ों के चिथड़ों से सूखे आम की डालों से शुष्क सागवान की छालों से उस दहकते अंगारों को ढक कर निश्चिंत होकर तुम बैठ गए अरे!!! …

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We, the animal

Today, I went to a park purposefully and the rationale for going there was certainly not the recreation, rather to have contemplation one specific subject. Since I knew, I may stay there for hours; hence I had some snacks and a bottle of water in my bag pack. Half an hour would have been passed, …

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रेस्टोरेंट का खाना ..

उम्र 13-14 की होगी. नीचे से उसके शर्ट के दो-तीन बटन टूटे हुए थे, जब वह दौड़ कर अपने पिताजी की तरफ़ आ रहा था तो हवा में उसकी शर्ट फैलने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे आकाश में कोई विशालकाय पक्षी अपना पंख फैलाये उड़ रहा हो. पावों में चप्पलें तो थी, पर मटमैली …

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चक्रवात..

चक्रवात ये जो तेरी यादों का समंदर है लगे जैसे कोई बवंडर है मैं ज्यों ही करता इनपे दृष्टिपात मन में उठता कोई भीषण चक्रवात मैं बीच बवंडर के आ जाता हूँ और क्षत विछत हो जाता हूँ इसमें चक्रवात का क्या जाता है वह तो तांडव को ही आता है अपने हिस्से की तबाही …

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विडंबना..

वो झूठ था मैं जानता था पर, सच को न जानने की ढोंग मैं करता रहा काश! मेरे उस ढोंग को तुम जान लेते मेरे हर झूठे हँसी में छिपे आह को , तुम पहचान लेते और अब जब कि वर्षों बाद तुमने ये जान लिया है कि मैं वो सच जानता था तो विडंबना …

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