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Thank You All !!!

हिन्दी के सभी पाठक मित्रों का विशेष आभार, स्नेह बनाये रखें!

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अपनी राह ..

 

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Clicked it, Yesterday Morning

अपनी राह..

 

राहों को अपनी, मैं खुद ढूंढ लूंगा
बन पथप्रदर्शक तुम, मुझे न उलझाओ||

मेरे उम्मीदों को अब, पर जो लगें है
अपनी आसक्तियों की, न जाल बिछाओ||

कष्टों का पहाड़ सीधे सिर पर सहा है
राह के रोड़ों से तुम, मुझे न डराओ||

सच है जो कड़वा, मैंने खुद चख लिया है
उसपर झूठ की मीठी तुम, परत न चढ़ाओ||

मंज़िल है मुश्किल औ’ लंबा सफर है
जो बीच में हो जाना, शुरू से साथ न आओ||

ज्ञान की दीपक अब जो जली है
अपने आंसुओं से उसे न बुझाओ||

जाना जहाँ है, राहों में कांटे बिछे हैं||
मेरे लिए अभी फूलों की हार न लाओ||

निराश लोगों की लम्बी पंगत लगी है
सांत्वना भरे गीत तुम, उन्हें ही सुनाओ||

नम्रता में मैंने जीवन है जीया
मेरे खुद पे भरोसे को, मेरा अहम् न बताओ||

………..अभय…………

 

 

शब्द सहयोग: पथप्रदर्शक: Guide; पर: Wings; रोड़ों: Pebbles; आसक्ति: Attachment; पंगत: Queue,  Line ;

नम्रता : Humility ;  अहम् : Ego ; सांत्वना: Sympathy; Condolence, Console.

यह कौन सा मौसम है?

 

 

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Jubilee Park, Jamshedpur. Credit: Google Image.

 

शाम को पार्क में बैठा था. हवा में ठंडक थी, मानो पेड़ एयर कंडीशन में बदल गये हों. उसके हरेक झोके मन को सुकून पहुँचाने वाले थे.

तभी, अचानक एक लड़के ने “चिप्स, आलू का चिप्स ” की आवाज़ लगायी. मेरी ओर बढ़ा और पूछा क्या आप लोगे ? मैंने उसे देखा. 14-15 साल का होगा. चेहरा मासूम सा. मैंने पूछा कितने के दिए? उसने कहा 10 की एक पैकेट. फिर, मैंने उससे नाम पूछा और पूछा कि कहाँ रहते हो. उसने नाम बताया “मुन्ना” और जहाँ रहता था उस बस्ती का नाम बताया. फिर मैंने पूछा कि स्कूल नहीं जाते? उसने बोला “हाँ जाता हूँ न, मैथ्स में कुछ पूछिये”.

उसका आत्मविश्वास देख में हतप्रभ था. शायद ही मैं किसी को इतने विश्वास से कुछ पूछने को कह पाता. मैंने कहा एक पैकेट दे दो. उसने चिप्स के बोरे में से एक पैकेट मेरी तरफ बढ़ा दी और पूछा कि पानी की  बोतल भी लेंगे? मैंने कहा नहीं, इसकी जरुरत नहीं है.

मेरी जिज्ञासा उसमे बढ़ी और पूछा कि पापा क्या करते हैं. उसने कहा “गोलगप्पे बेचते हैं, आप सोच रहे होंगे कि मुझे चिप्स क्यों बेचना पड़ता है”. मैं चुप रहा, वो खुद बोलने लगा “मेरी दसवीं की परीक्षा है और आगे मुझे और पढ़ना हैं. इंजीनियरिंग करना हैं. उसके लिए कोचिंग लगेगी. तो मैं शाम के खाली  समय में कभी कभी आकर बेचता हूँ. ज़्यादा नहीं पर थोड़े सही पैसे तो बच जायेंगे, जो बाद में काम आएगी नहीं तो सारा बोझ पिताजी पर आ जायेगा”.
तभी अचानक सिटी की आवाज़ सुनाई दी, दो सिक्योरिटी गार्ड मेरी तरफ दौड़ा, मुझे समझ नहीं आया कि हुआ क्या? तब  वो लड़का भागा. मैं हैरान. कुछ दूर तक गार्ड ने दौड़ाया, पर उसकी दौड़ काफी तेज थी, गार्ड मोटे थे, थक कर रुक गए. फिर वापस आने लगे.

मेरे मन में शंका हुई कि लड़का कहीँ चोर-वोर तो नहीं. गार्ड सामने से गुजर रहे थे, मैंने पूछा गार्ड साहब, उसको दौड़ाया क्यों? गार्ड साहब बोले “बदमाश हैं साले, बार बार मना करो फिर भी नहीं सुनते, पार्क में चिप्स या और कोई चीज बेचना मना हैं. प्लास्टिक का पूरा कचड़ा फ़ैल जाता हैं”.

चोरी वाली बात सोच मन मे लज्जा आयी. गार्ड भी अपनी ड्यूटी पर थे, पर लड़का अपनी ड्यूटी से ज़्यादा कर रहा था. रिस्क लेकर भी. तभी अचानक याद आया की इस अफरातफरी में मैंने तो उसको पैसे दिए ही नहीं और वह जाने कहाँ चला गया. सोचकर अच्छा नहीं लग रहा था. चिप्स का पैकेट लिए मैं घर की तरफ निकला. पार्किंग में लगी अपनी गाड़ी में जैसे ही चाबी लगायी की वो लड़का वापस आया और बोला “भैया पैसे”? सच कहूँ तो आज तक किसी को पैसे देने में इतना मज़ा नहीं आया था. जेब से 100 का नोट निकाला और बढ़ा दिया उसकी ओर उसने 90 रुपये वापस किये और मुस्कुराते हुए दूर जाने लगा …वह जिधर जा रहा था वहां अंधकार था, शायद  सरकार के  स्ट्रीट लाइट की रौशनी वहां तक नहीं पहुंचती होगी.

रात ढली और घर पहुंचा. खाना खाने के पश्चात, जब सोने की बारी आयी तो गर्मी का अनुभव हुआ, पंखा को 5 पर करके सोना पड़ा. रात ज्यों ज्यों ढली तो ठण्ड भी बढ़ने लगी, २ बजे के आस पास चादर शरीर पर जगह बना चुकी थी. 5 बजे नींद खुली तो देखा, पतली कम्बल ने भी मुझ पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था. उठा तो ठण्ड थी. नहाने के लिए पानी को थोड़ा गुनगुना करना पड़ा. घर से निकला तो बाहर पार्क में घास पर ओस की बूंद पड़ी थी, मानो बारिश हुई हो रात में. 9 बजे थे, धुप तो निकल चुकी थी पर हवा के चलने से तपिश का एहसास न था. पर दो पहर के खाने के बाद, जब बाहर खुले में निकला, तो ग्लोबल वार्मिंग का प्रत्यक्ष आभास हुआ. सोचा की फूल शर्ट पहनना ही ठीक था. पीने का पानी तो ठंडी ही जच रही थी. पेड़ के अधिकांश पत्ते पीले पड़कर, उसका साथ छोड़ रहे थे. पर कुछ नए पत्ते शाखों पर दिख रहे थे, मानो पेड़ की उम्मीद अभी बची हो…..
इतनी विविधताएं, यह कौन सा मौसम है …..बसन्त 🙂

 

मुन्ना के जीवन में कभी कोई ऐसा समय आया होगा कि वह सोचे कि अभी कौन सा मौसम है?

सैनिक मन

जो भी भारतीय हैं, उनके मन में अपने सैनिकों के लिए अपार सम्मान  होता है. युद्ध हो, आपदा आये, सैनिक ही रक्षक बनकर आते हैं. हाल ही के समय में सेनाओं पर हमले की खबर काफी ज़्यादा सुनने को मिल रही है. मन आहात था. कुछ पंक्तिया लिखीं, आप सब तक बढ़ाता हूँ. आप अपनी प्रतिक्रिया मुझ तक पहुंचाइए..

सैनिक मन

सेनाओं के मन में
ऐसे भाव कहाँ से आते हैं
जान हथेली पर रखकर भी वो
भारत की लाज बचाते हैं

उनके भी अपने होते हैं
बच्चे भी रोते हैं
मातृभूमि की रक्षा को जब वो
रणभूमि पर होते हैं

अश्रुपूर्ण नयन से पूछती संगिनी,
वापस कब तुम आओगे
कब पुत्र, पिता और पति का
अपना धर्म निभाओगे

हल्की सी मुस्कान लिए मुख पर वह कहते
मैं वापस आऊंगा
राष्ट्रधर्म है पर्मोधर्म:
पहले इसको मैं निभाउंगा

युद्ध हमें भी अच्छा नहीं लगता
बर्बरता की निशानी है
पर अगर शत्रु जो आँख दिखाए
सोयी नहीं जवानी है

…….अभय …….

गरीबी क्या होती है ??

 

आज शनिवार की छुट्टी थी, तो घर पर ही पड़ा था दिन भर. साढ़े 4 या 5 बजे होंगे, घड़ी नहीं  देखी थी . मेरी चचेरी बहन, जो 5 साल की है, सोकर उठी और ब्रश करने लगी. मैं और माँ हैरान हो गए, कि लोग सुबह और रात को ब्रश करते हैं, ये शाम में ही शुरू हो गयी. मैंने पूछा कि छोटी तुम अभी ब्रश क्यों कर रही हो? उसने बोला, “बड़ा भैया, आज गुड मॉर्निंग नहीं बोले आप”.
मैं और माँ को बहुत हंसी आयी और सारा खेल समझ आ गया. दोपहर में काफी लंबे समय तक सोने के बाद शाम भी उसे सुबह जैसी लग रही थी और वैसे तो उसको रोज जबरदस्ती करके स्कूल के लिए तैयार करना पड़ता है और वो आज खुद तैयार हो रही थी. माँ से पता चला कि मैंने भी बचपन में एक दो बार ऐसी हरकत की  थी. बचपन होती ही ऐसी है, है ना ?
तभी मेरे नाम से कोई पुकारने लगा,पापा ने बताया कि अन्नू (मेरे बचपन का दोस्त, लड़का ही है :-P) मिलने आया है. हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, पर बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हो पायी थी. बहुत दिन मतलब 5-6 साल. वह कहीँ और रहता है. मैंने उसे घर में बुलाया. अब शाम रात में बदल रही थी और किसी तरह छोटी को  भरोसा हो पाया कि यह सुबह नहीं, बल्कि शाम ही था.
मैंने दो चेयर लिया और अन्नू को  छत पर चलने को कहा. छत पर शांति भी थी और हवा भी अच्छी चल रही थी. बहुत सारी बातें हुई. नयी-पुरानी. बात चीत के क्रम में उसने बताया कि वह कल अपने किसी संबंधी के बारात में गया था, पर वह मुझे थोड़ा उदास सा लग रहा था. मैंने पूछा कि भाई सब ठीक तो है. उसने बोला कि हाँ सब मस्त है. पर मुझे वह मस्त कहीं से भी नहीं लग रहा था. मुझे याद है कि हम दोनों काफी करीबी दोस्त हुआ करते थे . हम अपनी लगभग सारी बातें एक दूसरे से साझा करते थे. पर अब समय काफी बीत गया था. मैंने फिर से पूछा कि भाई सब सही में अच्छा है ना?
उसने कहा, अच्छा एक बात बताओ ये “गरीबी क्या है”? मैं गरीबी क्या है, को परिभाषित कर सकता था, पर इस प्रश्न के लिए तैयार नहीं था, तो थोड़ा हिचकिचाने लगा और जो समझ आया बोला.

 

उसने कहा “कल कि एक घटना सुनोगे”? मेरे मन में बहुत अलग अलग विचार आ रहे थे. सोचने लगा कि शायद इन बीते दिनों वह शायद किसी बड़े आर्थिक संकट से गुजरा होगा. मुझे सोचता देख उसने झट से कहा, तुम्हे यह अजीब लग रहा हो पर मुझे तुम्हारे अलावा इसको शेयर करने वाला कोई और योग्य  नहीं मिला. मैंने कहा तुम सुनाओ घटना.
उसने शुरू किया. अब उसके शब्द ..
कल रात में मेरे सम्बंधित के घर से 8-9 बजे के करीब बारात निकली. मैं बहुत उत्साहित थे क्योंकि बहुत दिन हो गए थे किसी बारात में गए. माहौल भी बहुत अच्छा था, सबके चेहरे पर ख़ुशी, सबके चेहरे मुस्कुरा रहे थे, कोई जोक क्रैक कर रहा था तो कोई नए कपड़ों में तस्वीर लेने में व्यस्त था. दूल्हा, कार में पीछे, उसके आगे बारात. बारात के दोनों तरफ लाइट लिए हुए पंक्ति में बैंड बाजे वाले चल रहे थे. जैसा कि किसी भी अन्य भारतीय बारात में होता है. बीच में बैंड बाजे वाले अपने बाजे गाजे के साथ बारात में सामान्यतः बजने वाले गीत बज रहे थे.

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Representative Image, Source: Google.

चुकि, मुझे नाचना आता नहीं और नाचने में  शर्म भी आती है तो मैं बस भीड़ में खड़ा देख रहा था, पर यह भी सच है कि गानों के धुन पर पैर थिरक रहे थे . तभी मेरी नजर एक बैंड बाजे वाले कि तरफ पड़ी. वह मुँह से फूक कर बजने वाला इंस्ट्रूमेंट (नाम नहीं पता, नीचे की तस्वीर में देखिये ) बजा रहा था और उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे. मैं विचलित हो गया. मन तो किया कि उससे पूंछू कि क्या हुआ पर क्योंकि  वह बजाने में व्यस्त था और उसके चुप होने से सारे बाराती, जो सब नाचने में व्यस्त थे, का ध्यान उधर आता. मैंने सोचा कि हो सकता है वह नया होगा और बजाने में शक्ति तो लगती होगी, इस वजह से आंसू आ गए हों.  पर अचानक से बारात के बीच में से किसी ने आवाज़ लगायी अरे!!  ज़ोर से बजा… जोर से.. मेरे यार कि शादी है….और कुछ देर बाद एक नवयुवक (जो मुझे नशे में लगा) गाली गलौज पर उतर आया और कहने लगा पैसे दिए हैं जोर से बजा जोर से, दुबारा ये शादी नहीं होगी…

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Representative Image, source: Google

तभी उस बाजे वाले जिसके आँखों  से आंसू बह रहा था उसकी इंस्ट्रूमेंट किसी और बाजे वाले ने ले ली और उसके हाथ में छन-छन करने वाली झालर पकड़ा दी. मैंने सोचा चलो ठीक है. पर मेरा ध्यान उसपर ही था. बीच बीच में मैं इधर उधर होता पर मेरा ध्यान पता नहीं क्यों उसपर ही टिका रहा. कुछ देर बाद देखा तो वह रो ही रहा था. अब तो मैं बस बारात पहुँचने का इंतज़ार करने लगा।

 

जल्द ही बारात पहुंची और मैं सीधे उसके पास. 35-40 के बीच में उसकी उम्र होगी. मैंने पूछा, क्या हुआ भैया कोई तकलीफ. वो चेहरे का रंग गिरगिट कि तरह बदल के बोला “नहीं नहीं बाबू कोई बात नहीं . हो सकता है कि उसने सोचा हो कि मैं उसकी क्लास लूंगा.  पर मैंने फिर उससे पूछा कि  बजाते समय रो क्यों रहे थे. अब मानो कि उसके दर्द की  बाँध टूट गयी हो. वो फबक कर रोने लगा और बोला “बाबू  मेरा बेटा कल गुजर गया . वह 15 साल का था. डॉक्टर बाबू बोले रहे कि ठीक हो जायेगा, 17 दिन तक इलाज भी होता रहा, महाजन से 35 हजार कर्जा भी लिए पर वह कल गुजर गया गया. मैं यहाँ बैंड बाजा बजा रहा हूँ, झाल बजा रहा हूँ… आकाश में पठाखे देख रहा हूँ… लोग नाच रहें हैं… मेरा बेटा मर गया….
इसी बीच मेरे एक संबंधी, जो शायद सिगरेट पीने बहार आये थे,  ने मुझे वहाँ देखा और बोले चलो अंदर यहाँ क्या कर रहे हो..मैंने बोला आप चलिए मैं बस आता हूँ. उसकी व्यथा सुनकर उसके दर्द का आंकलन करने में भी मैं असमर्थ था . मैंने पूछा,  तो आज आये क्यों? उसने बोला बाबू  गरीबी लाती है खींच के, हम कहाँ आते हैं. कर्जा चुकाना होगा महाजन का 35,000 का 6 महीना बाद 50,000 लेगा. हम कहाँ से पैसा लाएंगे. दिन भर मजदूरी किये, ये बारात का मौषम बार बार नहीं आता है. चला गया तो बहुत दिन बाद आता है. बेटा चला गया पर घर में दो बेटी है, पत्नी है, काम नहीं करेंगे तो खाना भी मुश्किल होगा.
मेरी आँखे भर आयी. मुझे लग ही नहीं रहा था कि मैं बारात में आया हूँ. पॉकेट में हाथ डाला 1500 निकले, उसके हाथ में थमाने लगा. पहले तो उसने बहुत मना किया पर मैंने शादी कि बख्शीस बता के दे दी. उसने आशीर्वाद में कुछ बोल बोले, मैंने ध्यान से सुना नहीं मेरे मन में बस एक ही बात चल रही थी…बेटा खो गया और उसको बैंड बजाना पड़ रहा है, झाल बजाने पड़ रहे हैं, लोगों को नाचता देखना पड़ रहा है, पटाखे जलाते देखने पड़ रहे हैं…

 

उसने कहा “अभय, गरीबी कुछ और नहीं, यही है” और कह कर चुप हो गया. घटना पूरी तरह झकझोरने वाली थी. और जिस तरह मेरे दोस्त ने वर्णन किया वह भी अद्वितीय था. मुझे उसपर गर्व हुआ कि उसने दर्द को देखकर अपना चेहरा नहीं फेरा. वह आज भी पहले की  तरह था, मुझे खुद पर संदेह हुआ कि क्या मुझे अब लोगों का कष्ट नहीं दीखता.

 

तभी माँ हमारे लिए गर्म-गर्म समोसे और इमली की चटनी बना के लायी. मैंने अपने दोस्त को  देखा उसने मुझे और फिर उसने  समोसे को उठाया. वह मुस्कुरा रहा था. माँ ने पूछा समोसे कैसे बने हैं ……

तुम

तुम

उलझती जुल्फें

सरकती पलकें

चमकती आँखे

दमकता चेहरा

उस पर पहरा!

खनकती चूड़ी

सरकता आँचल

लटकती बाली

खनकता पायल

कितने घायल!

चहकती बोली

मचलती चाल

माधुरी मुस्कान

महकता तन

कितनो का बहकता मन !

गरजते बादल

बरसते पानी

कुहू की शोर

नाचते मोर

ज्यों देखे तेरी ओर !

विचलित मन

मौन हरदम

दिल में बर्फ जमी

आँखों में “नमी”

तेरी कमी

……..अभय……