Photo Courtesy: pinimg.com

सुनो कि अब तुम हो नहीं कि
घर का हर कोना सूना है
सब उत्सव जीवन से गए कि
अब बस, मन ही मन रोना है


Recently attended a marriage ceremony. I was from the bride side. Despite having tremendous work load, I saw the hollowness in the father’s heart and his feeling towards his only daughter. To portray that feeling in words is difficult especially if you haven’t gone through it. I wrote just four lines, hope you would like it!


Uff.. Ye Breakups

One of my close friends came to me crying like as child. I asked “What happened?” and to make him feel easier and draw a smile from his face I conjoined another question “Did you have breakup?”

He was dead serious and replied “Yes, how did you come to know Abhay?”

 I said “What!!!”

 “When did it happen? I was just kidding”

He replied “A year ago!”

I exclaimed “What!!!”

“You didn’t tell me for whole one year. I never saw you unhappy either. One year is long time and even if it would have happened, you must have got over it by now! What happened today?” I fired several volleys on him.

His succinct reply was “I tried to keep it dormant since past 12 months but she keeps up popping every time I try to forget her. Now today the threshold has crossed, you are the first one whom I am sharing, please help me get out from this miserable condition. Please make me forget her”

I became perturbed seeing the terrible condition of my friend. He seemed inconsolable.

I thought for a moment and replied “Well, you have all my sympathies. I can do whatever is possible for me to do for you. But since I have never experienced such situation, I think I am not the right person to make you forget her”

He quipped “All the time you talked about yoga, spirituality and so many things…Was all of them fake? Doesn’t all this have a solution for my problem?”

I became silent.  I have helped quite a few times to some people. Sometime I helped them is passing semester exams, sometime some financial help etc. But this was unique help asked from me. I offered him to go for a dinner and assured him that we will discuss tomorrow about this topic and probably will reach to a solution.

We had dinner. He told me the whole happenings. I paid proper attention to him to each and every story that he was narrating.

 I realized, sometime attachments can be very excruciating.  In this world everything is nonpermanent, comes with an expiry date but when we recognize the other thing as our eternal belonging, then problems creep in.

We returned home. I drove him to his home.  I returned to my bed. Lying on bed,  my eyes were wide open. I thought, I have told him that I will talk tomorrow about how to be normal and forget her, but in reality I simply don’t know what to tell him, how to make him feel normal.

“Should I ask this from my spiritual mentor? No..No..what will he think about me!!! ” a thought reverberated in my mind.

Seeing no other alternative, I thought of turning to a universal Guru “Google Guru” and I am not joking and my intention of mentioning it is not to dilute the gravity of the situation, but my helpless condition where I was put in by my friend, seeing no alternative and the ubiquitous nature of the problem I thought “Google” might come handy. Actually, it was not Google, but one of its subsidiaries “YouTube”.

I switched on my Lap Top and typed the URL “www.youtube.com”.

A lot of suggestive videos came just after typing the URL. It was mainly those videos which I watched frequently. It was of cricket, politics, some funny videos etc etc.

A lightening has struck my mind. “YouTube has also memory” I murmured. Well, this was not unusual to have in YouTube or any other shopping sites. They use the technology called “BigData” to see our browsing pattern and then they floods with similar content, but since my friend was grappling with one memory issue (of course not of memory loss) this usual pattern seemed unique to me.

Machines are made to behave as humans. That is why artificial intelligence is a buzz word now. Isn’t it? If you are not convinced search two words “Sophia” and “Qiu Hao”

on Guru. You will get to know the extent where we are heading.

Anyway, coming to the point, I thought YouTube has a unique feature called “Delete History” and you can also customize it by deleting  memory of past hour, week, month etc. . If we delete history, problem is solved. No Suggestive Videos of your previously watched content. All new, Fresh and Pristine.

Alas! My friend doesn’t have that setting called “Selective Deleting of History”.

Memory can be a reason of serious pangs in life.

Disclaimer : I know, you all will treat it as an act of fiction, but from my end its my duty to convey the same that it’s fiction only 🙂 Happy wala Sunday Guys 🙂

रेस्टोरेंट का खाना ..

उम्र 13-14 की होगी. नीचे से उसके शर्ट के दो-तीन बटन टूटे हुए थे, जब वह दौड़ कर अपने पिताजी की तरफ़ आ रहा था तो हवा में उसकी शर्ट फैलने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे आकाश में कोई विशालकाय पक्षी अपना पंख फैलाये उड़ रहा हो. पावों में चप्पलें तो थी, पर मटमैली सी,पुरानी और घिसी हुई..पर चेहरे के हँसी और ख़ुशी में कोई घिसावट नहीं. एकदम निश्छल, स्वछंद और आत्मविश्वास से भरी हुई..

रौशन के पिताजी ने उसके चेहरे के भावों को पढ़ लिया और ख़ुशी से पूछा “पास हो गए दसवीं?” रौशन ने कहा “पपा, दसवीं में हम जिले में तीसरे नंबर पर आएं हैं”. पिताजी, जो शहर के बाहरी छोड़ पर हो रहे निर्माण स्थल           (कंस्ट्रक्शन साइट) पर एक दिन में 200 रुपये की मजदूरी कर, वहां से 12 किलोमीटर दूर साइकिल चलाकरअपने छोटे से घर में दिन भर की थकान से चूर बैठे थे, अनायास ही उनकी सभी थकावटें जाती रही और उन्होंने भावविभोर होकर बोले “शाबाश, बेटा!!!”
साइकिल से अपने कार्य स्थल पर जाते हुए एक बहुत खूबसूरत रेस्टोरेंट को रौशन के पापा रोज देखते थे, और सोचते थे इसमें साहब लोग अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों के संग खाने को आते होंगे और यह भी सोचते थे कि किसी ख़ुशी वाले दिन वो भी अपने लोगों को लेकर इस होटल में जरूर आएंगे. पर उनके मन में संदेह रहता था कि क्या वहां का खर्च वो वहन कर पाएंगे, उनकी आमद ही कितनी ? यदि महीने के तीसो दिन काम करें तो भी 30 गुणे 200 मतलब 6000 के महीने. पर आज उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था और उन्होंने रौशन से कहा कि चलो आज तुम्हे ऐसा खाना खिलाएंगे कि तुमने खाया नहीं होगा. रोशन भी बहुत खुश, अपने पिता की ख़ुशी देख उसका सीना गर्व से प्रफुल्लित था.रौशन के पिता ने सोचा कि कितना महँगा होगा खाना, अपने दो दिन की कमाई को उन्होंने जेब में रख लिया और सोचा कि भले ही पूरी रकम खत्म भी ही जाये तो आज गम नहीं है

दोनों रेस्टोरेंट के गेट पर पहुंचे, गेट पर खड़े चौकीदार ने संदेह भरे आँखों से देखा, पर दरवाजा खोल दिया. रेस्टोरेंट को देख रौशन के मन में संदेह हुआ कि यह तो बहुत महँगा होगा और उसने अपने आशंका पिताजी को बताई, उसके पापा ने बोला कि आज ख़ुशी का मौका भी तो है, रौशन मुस्कुराया.

सामान्य लोग पहले किसी वास्तु का मूल्य पूछते हैं फिर चीजों को पसंद करते हैं, पर जो संपन्न होते हैं वो पहले चीजों को पसंद करते हैं फिर उसका मूल्य जानते हैं.
इसी प्रवृति का परिचय देते हुए कि कहीं खाने के बाद शर्मिंदगी न झेलनी पड़े इसलिए उसके पापा ने पहले खाने का दाम पूछना उचित समझा और रेस्टोरेंट के किसी कर्मचारी को बुलाकर उन्होंने ने जानकारी लेनी चाही..वेटर ने कहा एक प्लेट खाने की सबसे कम कीमत 500 रुपये! पिताजी के होश ही उड़ गए. उनके जेब में दो दिन की पूरी कमाई 400 रुपये थे, पर वह एक व्यक्ति के लिए एक वक़्त के खाने के लिए भी कम हो रहे थे. रौशन ने उनके चेहरे के बदलते हुए भाव को बख़ूबी पढ़ लिया. उसने बचपन से ही भावों को पढ़ना सीख लिया था. वेटर वहां से किसी और ग्राहक के पास चला गया .. रौशन ने अपने पापा से कहा “पपा, चलिए यहाँ से चलते हैं” पापा ने बोला “तुम कहीं नहीं जाओगे, यहाँ थोड़ी देर रुको, मैं घर से 100 रुपये लेकर आता हूँ, कम से कम तुम तो खा लोगे, मैं तुम्हें इतने शौक़ से लाया हूँ, भूखे नहीं जाने दूंगा” रौशन ने कहा “पपा, आपको लगता है हम ऐसा करेंगे? आप नहीं खाएंगे और हम यहाँ खा पाएंगे ?” पिताजी के आँखों में आँशु के कुछ बूंदें गहरी होने लगी थीं , और फिर उनके बेटे ने कहा कि “वैसे भी मुझे यहाँ का खाना अच्छा नहीं लगेगा, चलिए यहाँ से “. जो आँशु घने बादल के समान आँखों में मंडरा रही थी, अब उसने आँखों में उसने धार का रूप ले लिया था.. दोनों निकल ही रहे थे की वेटर ने पूछा “सर, आपलोग कुछ लेंगे नहीं?” रौशन ने कहा “आज नहीं, फिर कभी आएंगे”

नाव में छेद / Hole in the boat

At many occasions, I have experienced and also heard from different people that they are willing to move forward, yet they find it difficult in doing so due to some past failure, some memories which remains only in imagination, some unpleasant happenings in their life etc etc.

These impediments just work as a drag in their forward march. Yesterday I was discussing this subject with one of my friend. In doing so, few lines came to me and I am presenting it in public domain for your scrutiny and contemplation. I have termed the topic as “Hole in the Boat”. Do let me know your views.. 🙂


नाव में छेद 

धारा के विपरीत जाने से
न मैं कभी घबराता हूँ
हवा के वेग और दिशा को भी
चपलता से मैं भांप जाता हूँ

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि
हैआज सिंधु कितनी वीरान 
या आगे मेरा बाट जोहता
 है कोई समुद्री तूफ़ान

पर मुझे बस एक बात का डर है
एक बात की खेद है
मेरी नाव को जर्जर करती
इसमें एक छोटी सी छेद है

मैं जितनी तेजी से पतवार चलता हूँ
उतनी ही तेजी से इसमें जल भर आती है
फिर मेरी आधी शक्ति और समय भी
इसे खाली करने में लग जाती है

मैं यात्रा में कुछ दूर ही जा पाता हूँ
फिर वापस प्रस्थान बिंदु पर आता हूँ
अपनी यात्रा फिर से शुरू करने को
मैं विवश हो जाता हूँ

………अभय ……..