सशर्त प्रेम …

lb

नेह अगर है मुझसे तो बोलो

तुम क्या क्या कर सकते हो

जान ले सकते किसी की

या अपनी जान दे सकते हो ?

 

निष्ठा को साबित करने को

मैंने भी मन में ठान लिया

निज प्राणाहुति हेतु

तलवार गले पर तान लिया

 

तभी कुटिल मुस्कान लिए

उसने मुझसे बोला

अपने अप्रत्यासित अनुरोध का

राज़ था उसने खोला

 

“मुझे तो बस ये देखना था

तुम किस हद तक जा सकते हो

मेरे लिए क्या तुम अपना

सर्वस्व त्याग कर सकते हो”

 

तलवार गले पर था मेरे

तब भी न कोई टीस थी

निष्ठा को सत्यापित करना पड़ा

ये यातना बड़ी गंभीर थी

…….अभय……

P.S. Tried writing something new in different genre, please let me know does it make sense to you! Thank You.

Advertisements