जाल ..

"मानव ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ रचना है" एक वक्ता को जैसे ही मैंने कहते हुए सुना, मन में सैकड़ो ख्याल सरपट दौड़ने लगे. अब क्या कहूँ, कोई योगी तो हूँ नहीं कि एक बार में एक ही ख्याल से मनोरंजन कर सकूँ या विचारशून्यता की सतत स्थिति में रहकर परम आनंद का अनुभव ले सकूँ! …

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एक और दिसंबर बीत गया..

एक और दिसंबर बीत गया अभी तो सूरज निकला ही था और झट में फिर वो डूब गया एक और दिसंबर बीत गया अभी बसंत की हुई थी दस्तक पर अब, पत्ता पत्ता सूख गया एक और दिसंबर बीत गया जनवरी में कई कस्में खायी थी हमने पर अगणित बार वो टूट गया एक और …

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Contemplation..

I like sitting silently in any natural setting, contemplating on myriad thoughts. In cities, now there are hardly any pristine locations where one can sit and listen the chirps of the birds and can float in his/her imagination. But, of course, manmade parks come to rescue me at many occasions. If there is no one …

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ओह! ये प्रश्न!!!

ओह! ये प्रश्न!!! मैं चुप हूँ इसलिए नहीं कि पूछने को पास मेरे कोई सवाल नहीं है सोचता हूँ अगर कहीं जो सवाल कोई मैं पूछ गया तो तुम जवाब कहाँ से लाओगे? मनगढंत उत्तर के सघन वन में कहीं तुम लापता तो न हो जाओगे या किसी बहरूपिये का भेष धरकर मेरे सामने आओगे फिर मेरी …

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