जीत-हार

जीत-हार

हार के कगार पे

बैठे जो मन हार के

आगे कुछ दिखता नहीं

अश्रु धार थमता  नहीं

शत्रु जो सब कुछ लूट गया

स्वजनों का संग भी छूट गया

ह्रदय वेदना से भरी हुई जो

खुद की बोझ भी सहती नहीं वो

याद रहे हरदम

ज़िंदा हो अभी , मरे न तुम

वह कल भी था बीत गया 

यह पल भी बीत जाएगा

एक संघर्ष में हार से

युद्ध हारा नहीं कहलायेगा

सत्य धर्म के मार्ग चलो

हार से तुम किंचित  न डरो

सत्य धर्म जहाँ  होता है

वहीं जनार्दन होते हैं

जहाँ जनार्दन होते है

वहीं विजयश्री पग धोती है

……अभय…..

अनन्त नामों में से कुछ..

krishna
Credit: ISKCON

सनातन धर्म में चार युग बताये गए हैं. सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग. अलग-अलग युगों में ईश्वर प्राप्ति की अलग अलग विधियों का वर्णन है. सतयुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में अरचा विग्रह(मूर्ति पूजा) और इस कलयुग में यदि भव सागर को पार करना है, तो भगवान का नाम ही एक मात्र उपाय है.

भगवान के अनन्त नाम हैं, और हर नाम का कोई अर्थ. मैं उन नामों को देख रहा था और सोचा कि क्यों न इनको एक स्वर दिया जाये. पढ़िए और भगवान का स्मरण कीजिये.

अनन्त नामों में से कुछ…

केशव माधव मदन मुरारी
दयानिधि द्वारकाधीश बिहारी

यशोदानंदन मदनमोहन
देवकीनंदन घनश्याम

मुरलीधर श्याम मनोहर
मधुसूदन बलराम

विश्वरूप वासुदेव विश्वनाथ
जगद्गुरु जयन्ताह श्रीजगन्नाथ

लक्ष्मीकांत कंजलोचन
कमलनयन श्रीराम

अचल अजन्मा आदिदेव
पद्महस्ता परमपुरुष हिरण्यगर्भ

कृष्ण कन्हैया गोवर्धनधारी
मधुसूदन हरी मुरलीधारी

 

……….अभय………..