Parched..

So this image is from today’s morning walk. It’s just the March end and scorching heat has already arrived. Catchment area of various water bodies in the region is already drying up. Water is receding with fast pace, leaving behind the parched lands with big mudcracks. Whenever I take refuge to nature, it always inspires me and awards me creativity. So following is the outcome of today’s inspiration..

धरती, सूखती जल से….

जैसे जैसे तुमसे मेरी
दूरी बढ़ती जाती है
ह्रदय पर मेरे वैसे वैसे
अगणित दरार उभर कर आती है
यूँ तो जग में हर क्षण रवि
अपनी आभा ही फैलता है
फिर क्यों मेरे जीवन में वह
चिर तिमिर ही लाता है?
मेरा शत्रु क्यों बन जाता है!!!


कौन है जल, धरती कौन है और सूरज कौन? आप ही तय कीजिये…

Do let me know your views both on short poetry as well as on click 🙂 Have a happy weekend!!!

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हँसना मत भूलिये…. ;-)

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Credit: Google se uthaya

हँसना मत भूलिये…. 😉

ख़त उछाला मैंने तेरे छत पर,

तेरे पिता के हाथ आयी

भरी दोपहरी में मानों

हो मेरी सामत आयी

टशन में था तेरे छत के नीचे

दोस्त मेरा बुलेट पर ड्राइवर था

बन्दुक लेकर निकला तेरा बापू

मानों आर्मी का स्नाइपर था

बन्दुक देख मैंने झट से बोला,

अबे भाग, जल्दी से बुलेट दौड़ा

नहीं तो कोई और बुलेट चल जाएगी

काला चश्मा लेदर का जैकेट

सारी टशन मिट्टी में मिल जाएगी

हद तो तब हो गयी

बुलेट जब दगा दे गयी

उसने किक लगाया , सेल्फ लगायी

फिर भी वह स्टार्ट न हो पायी

दोस्त को बोला

अबे भाग, 100 मीटर वाली दौड़ लगा

गाड़ी छोड़, पहले

अब अपनी अपनी जान बचा

दोस्त मेरा वजनदार था

भागने में बिलकुल लाचार था

मैं दौड़ता गया

हाय! वो पकड़ा गया

मैंने सोचा अभी दौड़ते ही जाना है

कुछ भी हो अभी तेरे बापू के हाथ न आना है

और बात जहाँ तक दोस्ती के फ़र्ज़ की है

उसे अस्पताल में निभाना है😊

सुरक्षित स्थल तक जब मैं पहुंचा

तो तेरा कॉल आया

दोस्त पे क्या बीतती होगी, उसे कुछ पल भूल

मेरा चेहरा मुस्काया

पर तुम भड़क गयी और बोली

आप भी हद्द करते हैं

भारत मंगल पर पहुँच गया

और आप हैं कि मुझे खत लिखते हैं

और पकडे जाते हैं

अब आपकी एक नहीं सुनूँगी

आपके फ़ोन पे मैं खुद ही

व्हाट्सएप्प इनस्टॉल करुँगी

मैंने बोला यह सब तो ठीक है

ये बात बता, तेरे बापू ने

मेरे दोस्त का क्या हाल कर डाला है

कुछ हड्डियां छोड़ भी दी

या पूरा का पूरा तोड़ डाला है☺️

उसने कहा,

ऐसा कुछ नहीं घटा है

जो संग था आपके

वे मेरे दूर का रिश्तेदार में भाई निकला है

चौंक गया मैं

सोचा की क्या गड़बड़ घोटाला है

जो कल तक मेरा दोस्त था

अब होने वाला मेरा साला है 😜….

जीवन में हँसना मत भूलिये ……….

……….अभय…………

अब भी मेरे सपनो में आती हो…

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Photo Credit:onehdwallpaper.com

अब भी मेरे सपनो में आती हो…

हाथ पकड़ती थी वो,

कुछ दूर संग मेरे आती थी

देख न ले दुनिया,

जग से नज़रें चुराती थी

मेरे मन के हर कोने में

आशियाँ बनाती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…


अक़्सर लंबी थी जो राहें लगती,

संग तेरे सिमट जाती थी

जिसकी हर हँसी,

पीहू की याद दिलाती थी

हर सावन की पहली बारिश में,

संग मेरे भीग जाती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…


दिन तो बीते जैसे-तैसे,

पर रात ठहर जाती थी

अनायास ही मन को मेरे,

याद तेरी आती थी

हर पल हर क्षण संग हो मेरे,

एहसास कराती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…

………..अभय………..

समिधा

Samidha

समिधा

चहोदिशी यज्ञ की वेदी के
चौपाल लगाए लोग बैठे
सुधा कलश की आश लगाए ,
टकटकी लगाए, लोग बैठे
कह दो उन्हें कि इस यज्ञ की
समिधा पहले ही स्वाहा हो चुकी है
ज्वाला जो धधकती थी इसमें ,
शनैः शनैः कर अब बुझ चुकी है
समिधा बन अब खुद ही
यज्ञ कुंड में जलना होगा
सरिता हेतु अब हिमगिरि सा
मौन रह, खुद ही गलना होगा

…..अभय…..

समिधा-यज्ञ में आहुति हेतु प्रयोग की जाने वाली लकड़ी

When to speak…Whom to speak

बसंत तो अब बीत चुका है

कुहू तो बस अब मौन रहेगा

क्षितिज पर कालिख बदरी छायी है

सब दादुर अब टर-टर करेगा

                                       ~अभय

 

Spring has gone

Cuckoo will not sing any more

Dark clouds are hovering in the sky

Oh! It’s time for the frogs

                                                                                                 ~Abhay

 

कुहू- कोयल
दादुर- मेढ़क

आप पंक्तियों को खुद से जोड़ पाए तो मैं अपनी सफलता मानूंगा..

मैं, मेरी बहना और ये राखी …

संग आज नहीं हो तुम मेरे
ये कैसी होनी है?
मिठास नहीं है मुख में मेरे
कलाई भी सूनी है!

उदास मन से मैंने उसे
वीडियो कॉल  लगाया
राखी पर घर में न होने की
अंतर्व्यथा बताया

सोचा था मन की व्यथा
उधर भी वैसी ही होगी
मेरी अनुपस्थिति तो शायद
उसे भी खूब खली होगी

पर शैतानी हँसी देख
मैं भौचक्का रह गया
राखी के अवसर पर डिमांड  सुनकर
मैं हक्का-बक्का हो गया

कहा उसने
“तुम हो कहीं भी, अमेज़न पर मेरे लिए
आज ही iPhone X आर्डर कर  देना
और हो सके तो मेरी तरफ से
कलाई पर, एक राखी बांध लेना”

मैंने मन में सोचा
“क्या घोर कलयुग
इतनी जल्दी ही आ गया
भाई बहन के दिव्य रिश्ते को
भौतिक iPhone X खा गया !!!

😂😂😂

………अभय…….

क्यों भाईयों, क्या आपके संग भी ऐसा ही हुआ..और बहनों अपने कुछ ऐसा ही किया …….

दीप, अंधकार, प्रकाश और मैं..

नमस्ते मित्रों, कैसे हैं आप लोग? पिछले कुछ समय से समय की व्यस्तता के कारण हिंदी कविताओं का सृजन और उनका प्रेषण नहीं कर पा रहा था. पर सिर्फ समय को दोष दूँ तो कोई ठीक बात नहीं, समय के संग संग मन में भी विचार पनपने चाहिए और खास कर तब जबकि आप कोई पेशेवर कवि न हों.
कई दिनों बाद आज कुछ विचार आया आप तक पहुँचाता हूँ, ज़रा संभालना 🙂

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जो तुम दीप बुझा दोगे अपनी
घोर अँधेरी रातों में
और सोचोगे कि मैं अब संग मौजूद नहीं
तो मैं बता दूँ आपको कि
मैं न तो प्रदीप्त प्रकाश हूँ
न ही खामोश अंधकार कोई
मेरा अस्तित्व न तो
चंद दीयों पर निर्भर करता है
दीये के जलने पर भी मैं हूँ
दीये के बुझने पर भी मैं ही
माना नज़र न आ सकूँ
पर नज़र न आना और अस्तित्व न होना
दोनों एक बात तो नहीं
बोलो, है कि नहीं ?

…….अभय…….