फर्क किसी को पड़ता है

नयनों पर कोई बाँध नहीं
जलमग्न सदा ही रहता है
सुबह शाम में,शाम रात में
चुपके से जा मिलता हैं
सभी व्यस्त हैं,
जीवन में मस्त हैं
गैरों की उलझनों से
कहाँ कोई फर्क किसी को पड़ता है!

…..अभय…..

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