Transient World

An American tourist visited a sadhu.He was astonished to see the Muni’s room which was plain and simple. The only furniture was a mat and wooden pots.

Tourist :”With due respect, may I ask where’s your furniture and other household things?”

Muni: “Where is yours?”

Tourist : “Mine? But I’m only a visitor here.”

Muni: “So am I !’

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हँसना मत भूलिये…. ;-)

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Credit: Google se uthaya

हँसना मत भूलिये…. 😉

ख़त उछाला मैंने तेरे छत पर,

तेरे पिता के हाथ आयी

भरी दोपहरी में मानों

हो मेरी सामत आयी

टशन में था तेरे छत के नीचे

दोस्त मेरा बुलेट पर ड्राइवर था

बन्दुक लेकर निकला तेरा बापू

मानों आर्मी का स्नाइपर था

बन्दुक देख मैंने झट से बोला,

अबे भाग, जल्दी से बुलेट दौड़ा

नहीं तो कोई और बुलेट चल जाएगी

काला चश्मा लेदर का जैकेट

सारी टशन मिट्टी में मिल जाएगी

हद तो तब हो गयी

बुलेट जब दगा दे गयी

उसने किक लगाया , सेल्फ लगायी

फिर भी वह स्टार्ट न हो पायी

दोस्त को बोला

अबे भाग, 100 मीटर वाली दौड़ लगा

गाड़ी छोड़, पहले

अब अपनी अपनी जान बचा

दोस्त मेरा वजनदार था

भागने में बिलकुल लाचार था

मैं दौड़ता गया

हाय! वो पकड़ा गया

मैंने सोचा अभी दौड़ते ही जाना है

कुछ भी हो अभी तेरे बापू के हाथ न आना है

और बात जहाँ तक दोस्ती के फ़र्ज़ की है

उसे अस्पताल में निभाना है😊

सुरक्षित स्थल तक जब मैं पहुंचा

तो तेरा कॉल आया

दोस्त पे क्या बीतती होगी, उसे कुछ पल भूल

मेरा चेहरा मुस्काया

पर तुम भड़क गयी और बोली

आप भी हद्द करते हैं

भारत मंगल पर पहुँच गया

और आप हैं कि मुझे खत लिखते हैं

और पकडे जाते हैं

अब आपकी एक नहीं सुनूँगी

आपके फ़ोन पे मैं खुद ही

व्हाट्सएप्प इनस्टॉल करुँगी

मैंने बोला यह सब तो ठीक है

ये बात बता, तेरे बापू ने

मेरे दोस्त का क्या हाल कर डाला है

कुछ हड्डियां छोड़ भी दी

या पूरा का पूरा तोड़ डाला है☺️

उसने कहा,

ऐसा कुछ नहीं घटा है

जो संग था आपके

वे मेरे दूर का रिश्तेदार में भाई निकला है

चौंक गया मैं

सोचा की क्या गड़बड़ घोटाला है

जो कल तक मेरा दोस्त था

अब होने वाला मेरा साला है 😜….

जीवन में हँसना मत भूलिये ……….

……….अभय…………

अब भी मेरे सपनो में आती हो…

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Photo Credit:onehdwallpaper.com

अब भी मेरे सपनो में आती हो…

हाथ पकड़ती थी वो,

कुछ दूर संग मेरे आती थी

देख न ले दुनिया,

जग से नज़रें चुराती थी

मेरे मन के हर कोने में

आशियाँ बनाती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…


अक़्सर लंबी थी जो राहें लगती,

संग तेरे सिमट जाती थी

जिसकी हर हँसी,

पीहू की याद दिलाती थी

हर सावन की पहली बारिश में,

संग मेरे भीग जाती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…


दिन तो बीते जैसे-तैसे,

पर रात ठहर जाती थी

अनायास ही मन को मेरे,

याद तेरी आती थी

हर पल हर क्षण संग हो मेरे,

एहसास कराती जो

तुम अब भी मेरे सपनो में आती हो…

………..अभय………..

Happy Ending.. Assured!

If you ask me particularly, then I may say that I am not a movie buff. But that doesn’t mean I hate movies. Some of them had a lasting imprint on me.  Whatever number of movies that I have watched till today, I must say that, more than 95%of them had happy ending. Even those which ended in tragedy has several underlying messages with them, which has potential to change ones life dramatically. 

People generally like those movies which has several ups and downs in the life of “Hero”. We have a tendency to admire those movies in which actor rises to glory from most adverse situations. Movies are directed by Humans, scripted by Humans..even then majorly  it ends happily for protagonist.

Our life is also a movie. There are generally two categories of thoughts related to this story. One, Human writes their own stories and the other is that everything is being decided by fate or in other words everything is scripted by God and we are just playing our parts. When we write our own story then everything rests on us. We can shape our story according to our whim and can make every effort to give the story a happy ending. But for those who believe that their story is pre-scripted, for them also there is no reason for worry because if human can produce 95% of the stories ending in jovial mood, we can expect a perfect score from GOD in this regard.

So there is no question of sadness, there is no space for depression. Just play your act seriously and sincerely.Things will fall in to its place.