द्वंद्व

धूप शीतल छाँव तप्त जिसे वर मिला था वही अभिशप्त जो दृढ खड़ा था संदेह में है अकर्मण्यता से नेह में है जो पथप्रदर्शक था पथभ्रष्ट है वो शिथिलता से आकृष्ट है जो नित्य स्वरूप का उसे कोई तो स्मरण कराये इस हनुमान को कोई जामवंत तक ले जाये .........अभय ........

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साहस ..

दो परिस्थितयां हैं …एकदम सीधी सी, सुलझी हुई …पहला, जो साहसी होते हैं वो साहस से भरा कार्य करते हैं और  दूसरा, साहसिक कार्य करने से ही लोग साहसी कहलाते हैं ..तो हम किसी भी परिस्थिति में क्यों न हों, साहसी बनने का बराबर मौका है...

जीवन मतलब चुनाव

राखी की छुट्टी तो मिली नहीं, पर वीकेंड था और फिर एक दिन के लिए आप अस्वस्थ तो हो ही सकते हैं 😁. तो फिर मैं बिना समय व्यर्थ किये अपने बहन के घर राखी के एक दिन पहले पहुँच गया. बहन ने पूछा कि कल खाने में क्या बनाऊं..मैंने झट से बोला.. और क्या …

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नाव में छेद / Hole in the boat

At many occasions, I have experienced and also heard from different people that they are willing to move forward, yet they find it difficult in doing so due to some past failure, some memories which remains only in imagination, some unpleasant happenings in their life etc etc. These impediments just work as a drag in …

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