मौन क्यों हो ?

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स्पर्श

स्पर्श

थका हुआ सा

रुका हुआ हूँ

अतीत के बोझ तले मैं

दबा हुआ हूँ

यहाँ आशंकाओं

का है डेरा

जैसे कालिख

अमावस का

हो घेरा

पर मन

हारा नहीं मेरा

लगें हैं जैसे

यहीं पास में

तो है सवेरा

सवेरा आएगा

संग कई और हो आएंगे

अमावस में जिसने

थामा था हाथ मेरा

वह स्पर्श

कैसे भूल पाएंगे?

……अभय ……

सुनहरा धागा …

आज विश्व काव्य दिवस है, मतलब #World Poetry Day. आप सभी को बधाई. आज मेरी लिखी कुछ पंक्तियाँ आपके समक्ष …..धागे को विश्वास या भरोसे से बदल कर देखिये और इस कविता में इसकी सटीकता को ढूंढिए  …

 

arj

 

Background Image Credit: Google Image.