अहेतु की कृपा ..

हैरान हूँ!
तेरी सृष्टि से अनजान हूँ
पहेलियों से परेशान हूँ
दर दर भटकता हूँ
छोटे से प्रश्नों पर भी अटकता हूँ
तुम्हें हर जगह ढूँढता हूँ
आँखे भी मूँदता हूँ
पर तुम हो कि तुम्हारा कोई
पद चिन्ह नहीं दिखता
मन से मेरे संशय का
बादल भी नहीं छटता
शास्त्रों को सुना
तत्वदर्शियों से मिला
तुम से मिलने का मार्ग भी जाना
अफ़सोस है कि मैंने अब तक
खुद को न पहचाना
मार्ग मिलन का तुमसे
दुर्गम है, कठिन है
पर हम तो सामर्थ्यविहीन हैं
अहेतु की कृपा का मैं हूँ प्रार्थी
कब कृपा होगी मुझपर भी, हे पार्थ के सारथी !!!

…….अभय ………

शब्द सहयोग:

अहेतु की कृपा : Causeless Mercy
तत्वदर्शियों: Those who know the ultimate reality
सामर्थ्यविहीन : Without having any capacity
पहेलियों : Enigma
संशय: Doubt

Advertisements

स्मरण

स्मरण

आशंकाओं से घिरे पहर में ,

   दुविधाओं के बीच भंवर में,

     दर्द भरी आहों में,

      या सूनी राहों में

         मरुभूमि के टीलों में

           नेत्र बनी जो झीलों में

             या बंजर मैदानों में

             सूखे खेत खलिहानो में

                स्वजनित विपदाओं में

                 या प्राकृतिक आपदाओं में

जब जब हम खुद को

   हारा हुआ पाते हैं

     नेत्र स्वतः बंद हो जाते हैं

       वंदन को हाथ जुड़ जाता है

         कभी अहम् से था जो मस्तक ऊँचा

          वह  भी झुक जाता है

            दुःख की घड़ी में तो अनायास ही

              ध्यान प्रभु का आता है

                पर सुख के पहर में स्मरण ईश्वर को

                     शायद ही कोई कर पाता है

                                                                                 ~अभय