जीत गया ..

they are fearless bunch of people, standing and holding on the same ground where their friends has fallen few days back.
ये वही जमीं है
जहाँ कल तुमने
मेरे साथियों की
लाशें बिछा दी थीं
और सोचा था कि
हम टूट जायेंगे
बिखर जायँगे
डर जायेंगे
लो मैं आज फिर से खड़ा हूँ
सीना ताने
विलाप का भी समय नहीं है
रोने की भी चाहत नहीं
मैं साहस हूँ
मैं पुरुषार्थ हूँ
मैं निडर हूँ
मैं अजेय हूँ
मैं अभय हूँ
तुम बुजदिल थे
तुम कायर थे
तुम नफ़रत थे
तुम घिनौने थे
साहस नहीं कि
तुम प्रत्यक्ष लड़ो
तुम हारे हो
सारे अश्रुधार मैं पी गया
हाँ मैं फिर से जीत गया
.......अभय  .......
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समिधा

Samidha

समिधा

चहोदिशी यज्ञ की वेदी के
चौपाल लगाए लोग बैठे
सुधा कलश की आश लगाए ,
टकटकी लगाए, लोग बैठे
कह दो उन्हें कि इस यज्ञ की
समिधा पहले ही स्वाहा हो चुकी है
ज्वाला जो धधकती थी इसमें ,
शनैः शनैः कर अब बुझ चुकी है
समिधा बन अब खुद ही
यज्ञ कुंड में जलना होगा
सरिता हेतु अब हिमगिरि सा
मौन रह, खुद ही गलना होगा

…..अभय…..

समिधा-यज्ञ में आहुति हेतु प्रयोग की जाने वाली लकड़ी