Nomad

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And here in village..2

Nature is full of amazement. More you explore it, more it will astonish you. So when I noticed some beautiful structure made up of blades grass hanging from a tree, it caught my attention.

With little assistance from a countryman and more from Google, I got to know that these beautiful structures are nothing but the nests of Baya Weaver Bird. When you look at these tiny Baya bird and then the nests, you won’t believe that these nests are their creations. The nests are so intricately and beautifully build keeping every aspects of resident’s need that even modern day architects will admire.

I clicked some of the images, with a little difficulty as its position was strategically placed and difficult to reach!

 

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Sharing some of the interesting facts about the Baya Birds and their nests which I came across:

  • These weaver birds found across the Indian Subcontinent and Southeast Asia.
  • Baya weavers are social and gregarious birds. They forage in flocks for seeds, both on the plants and on the ground.
  • The breeding season of the baya weavers is during the monsoons.
  • Only male Baya birds builds the nest and the reason being just to woo their female counterpart!!!
  • So when the construction of nests remain in midway, male Baya birds by flapping their wings attracts the female counterpart and if she gets attracted, then inspects the nest. If she is satisfied with it and the loving bond gets established between them, then the male counterpart goes on completing the nest.
  • Some bird watchers also claim that at some occasions when the female birds have  rejected the nests, some male weaver have been spotted tearing it up, out of frustration! How amazing isn’t it?
  • These nests are generally made up on thorny trees, lying above the water bodies. The entrances to these nests are from a tube which is hanging in bottom of the nests. The reason being very simple that these mechanisms prevent can prevent the possible attack from any predator.
  • These nests works as heat shield and waterproof too.

 

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Did you notice Baya bird in the image? They are in camouflage! Or even you can blame my Phone camera! 😛 

 

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गांव मेरा और शहर तेरा

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Credit: Of course, non other than Google.

गांव मेरा और शहर तेरा

तेरे शहर में सभी
मेहमान से क्यों हैं ?
भीड़ तो है सड़कों पर मगर
एक दूजे से अनजान क्यों हैं?

याद आता है मुझे मेरा गांव
मिट्टी की ख़ुशबू, वो पीपल की छांव
गाय चराते वहां के गोपाल
हँसी-ठहाको से भरा चौपाल

तेरा शहर बड़ा व्यपारी है
यहाँ पानी तक बिकता है
मेरे गांव में सुबह शाम
बुजुर्गों से दुआएं मुफ्त में मिलता है

सड़के तेरे शहर की चौड़ी चौड़ी
यहाँ मन क्यों संकरी हो जाती है?
गांव में तो बिजली नहीं है फिर भी
मन से सबके सरलता की प्रकाश आती है

तेरे शहर में तुझे लोग
बड़ी गाड़ी और बड़े घर से जानते हैं
गांव में मुझे आज भी
मेरे पिता के नाम से पहचानते हैं

तेरे शहर में परिवार व्यवस्था है टूट रहा
संग अपनों का है छूट रहा
अब यहाँ पश्चिम की तस्वीर दिखती है
मेरे गांव ही है जहाँ भारत की आत्मा रहती है

चलो गांव में कि अब भी वहां पर
पीने को शुद्ध पानी और हवा मिल जाएगी
ज़्यादा नहीं तो दो चार साल और ज़्यादा ही
ज़िन्दगी में हँसी के पल जुड़ जाएगी

…………..अभय………………

 

कृषक और श्रमिक

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कृषक और श्रमिक

श्रमिक शब्द बना श्रम से है,
और कहते हैं कि परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता है,
फिर न जाने क्यों उनका सारा जीवन
कष्टों से जूझते बीत जाता हैं! ||1||

कहने को तो किसान
अन्नादाता कहलाते हैं,
पर न जाने कितनी राते
भूखे पेट वो सो जाते हैं!  ||2||

कृषक लोगों को अन्न देतें हैं
और हम उन्हें ऋण देतें हैं!
अन्न से हम सबका जीवन चलता हैं
ऋण से उनका जीवन ढलता हैं  |||3||

सारी दुनिया का बोझ उठाते है
और खुद के बोझ तले वे दबते ही चले जाते है
क्या करें मज़बूर हैं
क्योंकि वो मजदूर हैं  ||4||

श्रमिकों का जीवन द्वन्द से भरा हुआ होता हैं
आलीशान वे आशियाना बनाते हैं
पर खुद या तो नभ के नीचे
या झोपड़पट्टी में सारा जीवन बितते हैं!  ||5||

दुनिया कि शायद यही रीत हैं
उनके लिए सिर्फ हार हैं
ना कभी कोई जीत है
और शायद इसीलिए
जो जीव सबसे मेहनती होते है
वे गधा कहलाते है ||6||

… …. अभय……… 

Farmers and Labourers

I tried to portray the plight of the working class, farmers and labourers vis-à-vis the oligarchy in any developing country, with special reference to India.

The word, labourer (Old French) has been derived from labour. It is said that, your toil  never goes in vain. But don’t know why, whole life of labour passes by struggling with the miseries and pains. ||1||

Indeed, the farmers are known as food provider to the world, yet many night passes by when they don’t have a meal to eat. ||2||

Tiller provides us grains, and we provide them debts and loans. Grain gives us life and loan takes their life.  |||3||

They bear the burden of the whole world, yet they are unable to bear their own burden. But what they can do as they are compelled, since they are the labouer. ||4||

Life of the labourer is full of duality, they make luxurious houses for others, but they themselves forced to live either in the slums ghettos or under open sky. ||5||

But this seems to be the norm of the world, for labour, only defeat is inevitable they can never win. And may be this the reason that most labourish species are termed as donkey. ||6||

Thank you for reading the post!!!

गांव का एक और दिन

एक और यात्रा एक और कहानी. जीवन भी तो ऐसी ही है न? हर एक की अलग अलग कहानी। कुछ भविष्य तक टिक पाती है, कुछ इतिहास में समा जाती है. पर होती सबकी है. चलिए तर्क में न जाकर, यात्रा वृतांत सुनाता हूँ. तर्क नीरस होती है, घटनाएं रोचक.

वर्षों बाद अपने पैतृक गांव जाने का प्रयोजन बना. कुछ काम से ही, वहां से निकलने के बाद वर्ना गांव लौटता कौन है?
खैर मैं बहुत उत्साहित था. घर पहुंचा, तो हैरान हुआ. वातावरण पूरी तरह बदला हुआ सा था. सड़क पक्की, बिजली 20 घंटे, घरों के छत पर कभी खप्पड़  राज किया करती थी, अब अल्पसंख्यक हो गई है, सड़कों से बैलगाड़ी तो डायनासोर की तरह   विलुप्त हो गई है, साप्ताहिक हाट की जगह घर के पास ही सभी आवश्यक चीजों की दुकान जम गई थी. मोटर साइकिल जो इक्के दुक्के दिखते थे, अब बहुतायत उपलब्ध है.

सोचा गांव के आसपास का एक चक्कर लगा लूं. एक पड़ोसी  से मोटरसाइकिल का अनुरोध किया तो वे  सहज ही तैयार हो गए और चाभी बढ़ा दी। निकलने वाला ही था कि परिवार के एक सदस्य ने कान में फुसफुसा के गाड़ी में पेट्रोल डलवा देने का इशारा किया। मैंने भी झट से कहा “हाँ-हाँ  ये भी कोई कहने की बात है”.
पड़ोस के एक बच्चे को पकड़ा, उससे नाम पूछा, उसने बोला “सिपाही”. मैंने कहा “तुम क्या बना चाहते हो यह नहीं पूछ रहा, बस नाम पूछ रहा हूँ “. उसने कहा “गांव में सब सिपहिया ही कहते हैं, वैसे स्कूल में मास्टर जी हाजिरी के समय राहुल कहते हैं”. मैं मुस्कुराया और बोला चलो गांव घुमा के लाता हूँ, वो बोला कि “आप घुमायेगें या मैं”? मैंने कहा “ठीक है तुम ही घूम लेना “और हम निकल पड़े .

गाड़ी में किक लगाया, थोड़ी ही दूर जाने पर अनायास ही निगाहें पेट्रोल के कांटे पर गयी। पाया कि, बाढ़ की कोसी नदी के समान यह भी उफान पर थी. उसका  कांटा खत्म होने के निसान के विपरीत दिशा को छू रहा था. मन में मंद मंद मुस्कुराया। नोटबंदी के दौर में 100 रूपये कीमत आप लोगों से भी छुपी नहीं होगी.

5-10 गांव छान मारा। सड़क बहुत ही अच्छी थी. ठंडी हवा शरीर को छू रही थी। चलाने का मजा ही कुछ और था। कुछ तस्वीरें भी ली।

तभी अचानक मोटर साइकिल ने जर्क लिया और बंद हो गई. 5-10 किक के बाद भी स्टार्ट नहीं हुई तो निगाहें फिर से पेट्रोल के कांटे की तरफ गई। अरे ये क्या 20-25 किलोमीटर चलने के बाद भी इसके स्तर में कोई गिरावट नहीं हुई थी।  उसकी विश्वसनीयता पर संदेह हुआ और गाड़ी को  हिला डुला के देखा. और संदेह विश्वास में बदल गया.

पेट्रोल खत्म!!!!!

पीछे बैठे राहुल (सिपाही कहना अजीब लग रहा था ) से पूछा पेट्रोल पंप कितनी दूर है। उसने जवाब दिया ” 7 किलोमीटर और मरे हाथ में दर्द भी है “.मैंने बोला “हाँ-हाँ समझ गया। तुम धक्का नहीं देना चाहते”. पर 7 किलोमीटर……

तभी वह  उछला और बोला पीछे देखिये, और मैं मुड़ा और ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा कि एक दुकान पे खुले में ही पेट्रोल बिक रही है

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पेट्रोल की दुकान, जो मेरी रक्षा को आयी

भगवन का वरदान ही तो था, नहीं तो 7 किलोमीटर तक धक्का लगाना पड़ता.
दुकान पे पहुंचा तो देखा कि एक महिला बैठी हुई थी, मैंने बोला एक बोतल मुझे दे दीजिये. उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और भड़क कर थोड़ी मैथिलि थोड़ी हिंदी में बोली, “ये बोतल वोतल यहाँ नहीं चलता है हाँ, ये सब बाहरी आके ही बिहार को बदनाम करते हैं, हमारी सरकार ने बंद करके रखा है यहाँ पे. चाहिए तो जहाँ से आये हो वहीँ जाओ.

मैंने तुरत हिंदी से मैथिलि में स्विच किया और बताया कि मैं ये जो बाहर में रखी बोतल है उसकी बात कर रहा हूँ. वो मुस्कुराई और बोली “अरे! ऐसा बोलो न कि पेट्रोल चाहिए और बोल रहे थे बोतल चाहिए”. मैंने सोचा गलती स्वीकारने में ही भलाई है. और पूछा कि हाफ लीटर का कितना हुआ, वो बोली 40 रुपैया में आधा लीटर और 80 में एक लीटर. मैंने सोचा कि थोड़ा हास्यबोध (sense of humor) का उपयोग किया जाये, और बोला कि आपका तो नुकसान हो गया. वो बोली “वो कैसे”? मैंने बताया कि मेरे गाड़ी का  पेट्रोल खत्म हो गया था और आपका दुकान नहीं रहता तो 7 किलोमीटर धक्के देकर जाना पड़ता, सो आप 200 भी मांगती तो मज़बूरी में देना ही पड़ता.

वो लपक कर बोली ऐसे थोड़ी न होगा, पेट्रोल का दाम 100 रुपये में आधा लीटर ही है, मैं थोड़ा हंसने लगा और सोचा कि वो मजाक कर रही है . वो बोली हिहिया क्या रहे हैं, सच कह रहे हैं हम, आधा लीटर का 100 ही लगेगा, लेना है तो लीजिये वरना जाइये. मैंने कहा पर आपने कहा था कि 80 रुपये लीटर है. वो बोली तब कहा था सो कहा था अब 100 ही लगेंगे. मैंने 100 का नोट बढ़ाया और बोला आधे लीटर दे ही दीजिये, उसने माज़ा (Mazza) के हाफ लीटर बोतल में भरा पेट्रोल और एक कीप मेरी तरफ बढ़ाया. इससे पहले कि पेट्रोल का दाम और बढे, मैंने झट से पेट्रोल को टंकी में डाला. सेंस ऑफ़ ह्यूमर भरी पड़ गया था और सिपाही हंस रहा था.

 पेट्रोल डालते समय कुछ अंश हाथ में लग गया था,  अनायाश ही उसका सुगंध नाक में आयी, पर मैं हैरान हो गया कि उसमें से पेट्रोल की खुशबु कम और केरोसिन या मिट्टी तेल की खुशबु ज़्यादा आ रही थी. भारी मात्रा में मिलावट कि गयी होगी, ऐसा प्रतीत हुआ. अब मुझे संदेह हुआ कि मिट्टी तेल से गाड़ी चलेगी भी कि नहीं. किक मारने वाला ही था कि वो महिला आयी और 60 रुपये  वापस किया और मुस्कुराके बोली हम लोग भी मजाक कर सकते हैं और चली गयी. मुझे ये तरीका अच्छा लगा और हंसी भी आयी.

तभी दुकान के पास एक 20-22 साल का लड़का जो ये सब देख रहा था, मेरे पास आया और बोला इसका पति पियक्कड़ है, दिन भर दारू पी के  धुत्त रहता है, घर भी यही चलाती है.

किक मारा. गाड़ी एक किक में शुरू हो गयी, अब समझ कि वो बोतल सुनके इतना चिल्लाने क्यों लगी थी. गाडी चली  भी और पेट्रोल पंप तक पहुँच भी गया. हवा ठंडी ठंडी ही चल रही थी.किसान खेत में धान काट रहे थे, पूरी धरती सोने सी लग रही थी. सिपाही से पूछा “मेरे देश कि धरती सोना उगले…. ये गाना सुना है?” उसने कहा “हम पुराना गाना नहीं सुनते हैं”. मैंने पूछा कि “कौन सा गाना सुनते हो”? उसने कहा “कमरिया करे लपालप…..”. और वह जोर जोर से गाने लगा. मैंने भी गाड़ी के एक्सीलरेटर पे जोर लगाया. मोटर साइकिल पेट्रोल से चल रही थी कि केरोसिन से पता नहीं….