गीत गाऊँ

जीवन में अगणित फूल खिले
सुख के दिन चार ,
दुःख की कई रात मिले
आशाओं की ऊँची अट्टालिकाएं सजाई
नियति को उनमे , कई रास न आयी
कुछ ही उनमे आबाद हुए
कई टूटे , कई बर्बाद हुए
किसे दोष दूँ मैं ,
किसे दुःख सुनाऊँ
जाने मैं कौन सा गीत गाऊँ

स्वयं की खोज में मैंने
कईयों को पढ़ा
सैकड़ों ज़िंदगियाँ जी ली मैंने
मैं सहस्त्रों बार मरा
सोचा था कि तुम संग,
चिर अन्नंत तक चलोगे
मुझे क्या पता था कि तुम
पग – पग पर डरोगे
किसे मैं जीवन के ये अनुभव सुनाऊँ
जाने मैं कौन सा गीत गाऊँ

ये भ्रम में न रहना कि
मैंने ये दुःख में लिखा है
या अपने आसुंओ को मैंने
स्याही चुना है
ये उनके लिए हैं
जो ज़िंदा लाश नहीं हैं
या उनके लिए है
जिन्हे अभी खुद पर विश्वास नहीं है
अन्नंत आघात हैं मुझपर, फिर भी मुस्कुराऊँ
“विपदाओं में टूटकर बिखरो नहीं”, मैं यही गीत गाऊँ

……….अभय ………

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बेख़ौफ़!

बेख़ौफ़! अँधेरी रातों में, हाथों में लिए दीया , ये कौन चल रहा है?

हैरान हूँ! मैं इस ज़माने से, जाने क्यों वो उससे, इस क़दर जल रहा है?

                                                                                                                                             ~अभय

बस तेरा इंतज़ार है..

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धम से गिरे
धरनी पर
शिखर से,
ज़ख्म गहरा हुआ
चोट हरा हुआ
पर गिरने का यह पहला
वाक़या तो न था
कई पहले भी लुढ़के
गिरे गर्त में
वर्षों तक
सिसकते रहे
मरणासन्न रहे
संवेदनहीन रहे
निर्जीव सा गौण रहे
व्योम सा मौन रहे
पर लड़ते रहे
जूझते रहे
झुलसते रहे
आपदाओं में
विपदाओं से
लोगों की विष भरी
बोली से
आलोचकों की अगणित
टोली से
तो तुम जो गिर गए
तो इसमें नया क्या था?
कि अब तुम उठते ही नहीं
कि तन के ज़ख्म भी
जब सूखते हैं
हम उसे कुरेदते नहीं हैं
तो मन के ज़ख्म पर
ये अत्याचार क्यों?
स्मरण रहे कि
जो शिखर पर तुम पहुंचे थे
तब भी पुरुषार्थ लगा था
फिर से पुरुषार्थ लगेगा
कि तुममें जो नैसर्गिक है
वो भला तुमसे कौन लेगा?
कि अब दुर्बलता छोड़ो
कि सब तैयार हैं
हिमालय की
सबसे ऊँची चोटी को
बस तेरा इंतज़ार है

…….अभय …….

कविता का भाव आप लोगों तक पहुंचा हो, तो अपने भाव मुझ तक पहुँचाना न भूलें 🙂

शब्द सहयोग:
गौण: Subordinate, Secondary
व्योम: Sky, Space
नैसर्गिक: Inherent

द्वंद्व

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धूप शीतल
छाँव तप्त
जिसे वर मिला था
वही अभिशप्त

जो दृढ खड़ा था
संदेह में है
अकर्मण्यता से
नेह में है

जो पथप्रदर्शक था
पथभ्रष्ट है वो
शिथिलता से
आकृष्ट है जो

नित्य स्वरूप का उसे
कोई तो स्मरण कराये
इस हनुमान को
कोई जामवंत तक ले जाये

………अभय ……..

मुट्ठी भर रेत

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मुट्ठी भर रेत

शीशे के पात्र में संचित
रेत तुम्हारा जो रखा था
वह धीरे धीरे बह रहा
कुछ-कुछ तुमसे शायद वो कह रहा
क्या तुम भी उसे सुन रहे ?

इस शीशे के पात्र का
आकार अलग हो सकता है
इसमें संचित रेत की मात्रा
भी असमान हो सकती है
क्या तुम्हें अपने बचे रेत का अनुमान है?

इस शीशे के पात्र को तुम
मनमर्जी से पलट नहीं सकते
यह ऐसा खेल है जिसके नियमों को
सुविधा से तुम बदल नहीं सकते
क्या तुम इसके नियमों में ढल पाए ?

इस शीशे के पात्र में रखा रेत जो
एक बार पूरी तरह बह जाए
मन में दबी आशा अपेक्षा
सदियों तक मलबे में ही रह जाए
क्या तुम हिस्से की रेत के संग न्याय कर पाए ?

……….अभय……….

साहस ..

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दो परिस्थितयां हैं …एकदम सीधी सी, सुलझी हुई …पहला, जो साहसी होते हैं वो साहस से भरा कार्य करते हैं और  दूसरा, साहसिक कार्य करने से ही लोग साहसी कहलाते हैं ..तो हम किसी भी परिस्थिति में क्यों न हों, साहसी बनने का बराबर मौका है…

She shines

Who motivates us?

When someone achieves some extraordinary feat, even when they face a lot of hurdles and pains in their way, in my opinion, those persons motivate us. Isn’t it?

But, it is true that this is not the case for all of us, as many claims that they are self motivated. Many argue that no humans can be their motivation as they are only motivated through divine aspect of the nature.

Have you ever been in any situation in your life where you have felt that you are alone amidst the mob? Yes, No.

Anyway, Skip this question and face a new one.

Have you ever been really alone and secluded, where no one is besides you and the closet person are physically situated miles apart from you? I think most us wouldn’t have experienced this kind of situation.

Six girls decided the fate that they are going to place themselves in the same situation and that too willingly. They are Lieutenant Commander Vartika Joshi , Lieutenant Commander Pratibha Jamwal, Lieutenants P Swathi, Vijaya Devi, Payal Gupta and B Aishwarya.

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Credit: Internet

Do you know them? Yes, No. Doesn’t matter, even I were oblivious of them till recently.

I think they are worth knowing. That is why I decided to write about them.

All of them, whose name I have mentioned, are officers of Indian Navy and they have decided to circumnavigate the earth without any assistance of their male counterpart. This means that all women crew, for the first time in the History of India, have decided to have a complete a circle around the earth in a ship called INS Tarini. They have already started the journey and has reached the first leg of it.

 

 

 

The mission is termed as Navika Sagar Parkirama. This mission was flagged by, first full time female Defence Minister of India, Nirmala Sitaraman.

Few facts about the mission:

  • INSV Tarini is 55 foot sailing vessel built indigenously in India by M/s Aquarius Shipyard Pvt Ltd, Goa.
  • The expedition will be covered in five legs, with stop-overs at 4 ports Fremantle (Australia), Lyttleton (New Zealand), Port Stanley (Falklands), and Cape Town (South Africa) for replenishment of ration and repairs as necessary.
  • It will circumnavigate globe in approximately 165 days and is expected to return to Goa in April 2018.
  • The ship will promote Make in India, as it is indigenously built.
  • The crew will check and collect the data for marine pollution.

Many of you would be aware that in ancient time, Indians were not supposed to cross over the oceans, because it was termed as inauspicious. That was the day and this is the day, when only women crew has started a voyage to break the shackles of the idea that women are subordinate to men and they can’t venture alone in life. Imagine the journey, it will not be easy. There will be dark nights, and that too in ocean. There may be no humans in their sight for miles. The sound of the ripples of the ocean may be horrific.  Some waves will be huge. They may encounter some pirates in their journey. The ship is not too big and waves and thunderstorm may test their mettle in mid way. But they are prepared for it. They have already faced the waves of prejudice and subjugation by male dominated society, probably their voyage will be easier than the voyage that women has had over the centuries in India. They have decided to lost in joy of the journey, and when they will return back to Indian Coast, probably many Indians will discover a new perspective.

These all  girls inspired me, and I hope they will also inspire you!!!