Deciphering Cloud :-)

Deciphering the patterns of cloud must be one of your favourite tasks, isn’t it? What do you see in the below click.. let me see your imagination 😀

animal

Advertisements

36 thoughts on “Deciphering Cloud :-)”

  1. सच में बादलों के परिवर्तित रूप को देखना मजेदार लगता हैं,
    अभी तो ऐसा लग रहा जैसे कोई विशालकाय जानवर अपनी मुंह से सूर्य को धीरे धीरे बाहर निकाल रहा है .

    Liked by 3 people

    1. जी बिलकुल, कल्पनाओं के पंख को हम यदि खोल लें तो पूरी समष्टि के दर्शन इन मेघ के गुब्बारों में हो जाती है !!!

      Liked by 1 person

  2. My first impression on the image:
    यह है करोड़ों साल पहले का नज़ारा
    दुनिया से समाप्त हो गया था उजियारा
    बाल काल में कपि भक्ष लियो रवि
    तीनों लोकों में हुवा घनघोर अँधियारा
    देवों ने आकर जब करी उनसे विनती
    उगला सूरज को और कष्ट निवारा
    हनुमानजी के श्रीमुख से निकल रहा सूरज
    यही इस तस्वीर में है साफ़ साफ़ दिखलाया

    Liked by 2 people

    1. वाह बेहतरीन कल्पना।शानदार सर्।।।

      जिसके ताप से सृष्टि चला करती है,
      जिसके प्रकाश पर नजर नहीं ठहरती है,
      सर्दी में सुकून,ग्रीष्म में वदन जलता है,
      जिसके ताप से जग त्राहिमाम करता है,
      सोच कर देखो
      कैसा लगा होगा जब एक बालक उसे निगला होगा,
      ऐसी ही तस्वीर होगी शायद,जब उसे वह उगला होगा।

      Liked by 2 people

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s